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भोपाल-इंदौर आगे, ग्वालियर को 10 साल बाद भी नहीं मिला सबसे बड़े निकाय होने का दर्जा

भोपाल को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने और इंदौर के एरिया रिवाइज करने की कवायद तेज है, लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े क्षेत्रफल वाले शहर ग्वालियर को अब तक उसका हक नहीं मिल पाया है। महापौर द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी शासन स्तर पर चुप्पी बनी हुई है।
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भोपाल-इंदौर आगे, ग्वालियर को 10 साल बाद भी नहीं मिला सबसे बड़े निकाय होने का दर्जा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ग्वालियर क्षेत्रफल के मामले में प्रदेश का सबसे बड़ा शहर होने के बावजूद अब तक आधिकारिक दर्जे से वंचित है। इससे न केवल प्रशासनिक ढांचे पर असर पड़ रहा है, बल्कि शहर को मिलने वाली आर्थिक मदद भी सीमित है। अब देखना होगा कि शासन इस मुद्दे पर कब फैसला लेता है।

    अभी तक नहीं मिला सबसे बड़े निकाय का दर्जा

    ग्वालियर नगर निगम का क्षेत्रफल साल 2014-15 में बढ़ाकर 423 वर्ग किलोमीटर किया गया था। इसमें 60 वार्डों के साथ 72 गांवों को जोड़कर 6 नए वार्ड बनाए गए थे। इसके बावजूद ग्वालियर को आज तक प्रदेश के सबसे बड़े निकाय का दर्जा नहीं मिल पाया है। जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से ग्वालियर, भोपाल और इंदौर से भी आगे है।

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    निकाय का दर्जा मिलते ही बदल जाएगा पूरा सेटअप

    अगर ग्वालियर को सबसे बड़े निकाय का दर्जा मिलता है, तो नगर निगम के सेटअप में बड़े बदलाव होंगे। इसमें दो नए अपर आयुक्तों की नियुक्ति और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या बढ़ना तय है। इससे प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा और शहर के विकास कार्यों में तेजी आ सकती है।

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    चुंगी राशि बढ़ने से मिलेगा बड़ा फायदा

    फिलहाल ग्वालियर नगर निगम को चुंगी के रूप में करीब 15 करोड़ रुपए मिलते हैं, जिसमें से बिजली बिल कटने के बाद केवल 4 से 5 करोड़ ही बचते हैं। लेकिन क्षेत्रफल के आधार पर दर्जा मिलने के बाद यह राशि बढ़कर 25-30 करोड़ तक हो सकती है। इससे पूरे साल में करीब 300 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने की संभावना है।

    प्रस्ताव भेजा, लेकिन फैसला अब भी लंबित

    महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव भेजकर ग्वालियर के 423.71 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को मान्यता देने की मांग की थी। लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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