भोपाल। मिडिल ईस्ट का युद्ध और छीनी गई कई जिंगदियां, जिसका असर दुनियाभर के कई देशों में पड़ रहा है। युद्ध की आग में भारत भी झुलसा जिसने ऊर्जा और गैस जैसे निर्भर क्षेत्रों पर बुरा असर डाला। राजधानी में भी इस तनाव का साफ असर देखने को मिला है। जो आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा रहा है, सिलेंडर की किल्लत के कारण छोटे व्यवसायी इसकी सबसे ज्याद मार झेल रहे हैं।
जो चाय और पोहा कभी आम आदमी का सस्ता और आसान नाश्ता हुआ करता था, अब वह भी महंगा हो गया है। चाय के दाम बढ़ने के साथ-साथ पोहे की प्लेट भी पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत में मिल रही है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो रोज सुबह बाहर नाश्ता करते हैं।
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सबसे बड़ी परेशानी एलपीजी गैस को लेकर सामने आ रही है। ठेले और छोटे दुकानदारों का कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे उनका खर्चा बढ़ गया है। दुकानदार चंद्र प्रकाश पटरे, हरि शंकर, कैलाश मोर जाटव ने बातचीत करते हुए बताया कि जिस गैस पर उनका रोज का रोजगार चलता है।
वही अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। एक तरफ ग्राहक महंगाई से परेशान हैं, तो दूसरी तरफ दुकानदार भी लाचार नजर आ रहे हैं। रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है और इसका असर छोटे-छोटे कारोबारों पर साफ दिख रहा है।
स्थानीय ठेले वालों और छोटे कारोबारियों का कहना है कि महंगाई के चलते उनकी कमाई घटती जा रही है। छोटे व्यवसायी लोकेश कुमार, हरि यादव और अशोक कुमार बजाज ने कहा कि ग्राहक अब कम खर्च कर रहे हैं या सस्ता विकल्प तलाश रहे हैं, जिससे बिक्री पर असर पड़ा है।
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महंगाई की मार केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है। आम लोग भी अब अपने खर्च में कटौती करने लगे हैं। जहां पहले लोग बिना सोचे-समझे चाय-नाश्ता कर लेते थे, अब वही लोग खर्च सोच-समझकर कर रहे हैं।