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भोपाल:ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन, विशेषज्ञों ने कहा- विकास के साथ प्रकृति को बचाना जरूरी

भोपाल में IEI के राष्ट्रीय सम्मेलन में ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने विकास के साथ पर्यावरण बचाने पर जोर दिया।
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ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन, विशेषज्ञों ने कहा- विकास के साथ प्रकृति को बचाना जरूरी
ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन

राजधानी भोपाल में हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया (IEI) के मध्य प्रदेश स्टेट सेंटर की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘Fostering Green Energy and Environmental Sustainability for India: विकसित भारत 2047’ रहा। इसमें ग्रीन एनर्जी, पर्यावरणीय स्थिरता और भविष्य के विकास मॉडल पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

जलवायु परिवर्तन गंभीर ग्लोबल संकट

सम्मेलन को संबोधित करते हुए एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग डिवीजन बोर्ड के राष्ट्रीय चेयरमैन इंजी. जेसी सिंघल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के साथ क्लाइमेट 2070 के उद्देश्य को पूरा करने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए इंजीनियरों को भी पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी के महत्व को समझना होगा। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है लेकिन इसके साथ पर्यावरण को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देकर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

इंजीनियर निभा सकते हैं अहम भूमिका

जेसी सिंघल ने कहा कि देशभर से आए इंजीनियर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श समाज में पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा। इस विषय को और व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी की जा रही है।

विकास योजनाओं में पर्यावरण सुरक्षा पर जोर

IEI के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. मनीष कोठारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए इंजीनियरों को ऐसी योजनाएं तैयार करनी होंगी, जिनमें विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सड़क, पुल और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की योजना बनाते समय जियो स्पेशियल तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भोपाल सम्मेलन अहम कदम

BHEL भोपाल के कार्यपालक निदेशक इंजी. प्रदीप उपाध्याय ने कहा कि भोपाल में आयोजित यह सम्मेलन ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई तकनीकों और पर्यावरण अनुकूल विकास मॉडल को बढ़ावा मिलता है। वहीं, IEI मध्य प्रदेश स्टेट सेंटर के अध्यक्ष इंजी. अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए तकनीकी समाधान तैयार करना समय की जरूरत है।

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विशेषज्ञों ने हरित ऊर्जा और पर्यावरणीय स्थिरता पर किया मंथन

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से आए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों ने हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास जैसे विषयों पर चर्चा की। सम्मेलन में पर्यावरण में तेजी से सुधार लाने के उपायों, नई तकनीकों और ग्रीन एनर्जी के विस्तार पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। इस दौरान IEI के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. मनीष कोठारी, BHEL भोपाल के कार्यपालक निदेशक इंजी. प्रदीप उपाध्याय, एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग डिवीजन बोर्ड के राष्ट्रीय चेयरमैन इंजी. जेसी सिंघल सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

युवा इंजीनियरों को दिए गए पुरस्कार

सम्मेलन के दौरान युवा इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को उनके बेहतर कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया। युवा प्रतिभाओं को IEI Young Professional Award, State-of-the-Art Award और Eminent Engineer Awards प्रदान किए गए। इसके अलावा युवा वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत शोध पत्रों पर भी चर्चा की गई।

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विकसित भारत के लिए ग्रीन टेक्नोलॉजी जरूरी

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य का विकास पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए। बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार तकनीक और इंजीनियरिंग के माध्यम से ऐसा विकास मॉडल तैयार किया जा सकता है जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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