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भोपाल GMC में हंगामा!मेडिकल टीचर्स ने किया पेन डाउन आंदोलन, भर्ती प्रक्रिया पर जमकर विरोध

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में भर्ती प्रक्रिया ने भूचाल मचा दिया है। वरिष्ठ मेडिकल टीचर्स ने 'आंतरिक सीधी भर्ती' को अवैध बताते हुए एक अप्रैल को पेन डाउन आंदोलन का ऐलान किया है। दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक सभी शिक्षक काम बंद कर अपनी नाराजगी दिखाएंगे।
मेडिकल टीचर्स ने किया पेन डाउन आंदोलन, भर्ती प्रक्रिया पर जमकर विरोध
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    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में ‘आंतरिक सीधी भर्ती’ को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। कॉलेज के चिकित्सा शिक्षकों ने खुला विरोध जताते हुए 1 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक पेन डाउन आंदोलन का ऐलान किया है। इस आंदोलन में शिक्षक काम बंद कर अपनी नाराजगी दिखाएंगे।

    क्यों है विरोध?

    प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (PMTA) के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीया ने कहा कि कॉलेज में चल रही भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह अवैधानिक है। उनका कहना है कि इस तरह की सीधी भर्ती से चिकित्सा शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अगर सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देंगे, तो बड़े पैमाने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।

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    PMTA का प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को सीधे राज्य सरकार तक ले जाने की तैयारी कर रहा है। वहीं, एक अप्रैल को डिप्टी CM और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी प्रस्तावित है।

    पेन डाउन आंदोलन: दबाव बढ़ाने की रणनीति

    शिक्षकों ने तय किया है कि एक अप्रैल को एडमिशन ब्लॉक में दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक पेन डाउन आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान सभी शिक्षक काम बंद कर विरोध दर्ज कराएंगे।

    GMC ने प्रोफेसर के 4 और एसोसिएट प्रोफेसर के 5 पदों के लिए सीधी भर्ती के विज्ञापन जारी किए हैं। शिक्षकों का कहना है कि इन पदों को नियम के अनुसार पदोन्नति से भरा जाना चाहिए, न कि बाहरी आवेदन से।

    पहली बार अंदरूनी विरोध

    मध्य प्रदेश में यह पहली बार है कि किसी भर्ती प्रक्रिया का विरोध संस्थान के पात्र कर्मचारियों ने खुद किया है। गांधी मेडिकल कॉलेज में जारी इस ‘आंतरिक सीधी भर्ती’ के विज्ञापन के खिलाफ मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमडीए) ने कड़ा रुख अपनाया है।

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    फॉरेंसिक मेडिसिन सभागार में हुई एग्जीक्यूटिव बॉडी मीटिंग में 42 पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से भर्ती प्रक्रिया का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। बैठक में साफ कहा गया कि वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति केवल विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के माध्यम से होनी चाहिए।

    न्यायिक उदाहरणों का हवाला

    शिक्षकों ने अपने विरोध को मजबूत करने के लिए कई न्यायिक उदाहरण पेश किए। ग्वालियर के जीआरएमसी में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।

    खंडवा मेडिकल कॉलेज में भी न्यायालय ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया। वहीं, रतलाम मेडिकल कॉलेज में इस मामले पर फिलहाल स्टे लगा हुआ है। इन उदाहरणों के आधार पर जीएमसी में जारी सीधी भर्ती प्रक्रिया को शिक्षकों ने अवैधानिक बताया।

    निंदा प्रस्ताव और ज्ञापन

    बैठक में सीधी भर्ती के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई गई। शिक्षकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से सर्विस प्रोटेक्शन खत्म हो जाएगा और भविष्य में प्रमोशन और वेतन लाभों में भारी असमानता पैदा होगी।

    लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अधिकारों को नजरअंदाज कर सीधी भर्ती लागू करना न्यायसंगत नहीं माना जा रहा है। बैठक के बाद सभी पदाधिकारी अधिष्ठाता (डीन) कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। इस दौरान केवल सामूहिक विरोध ही नहीं, बल्कि पात्र शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से भी लिखित बहिष्कार पत्र जमा किए।

    अब आगे क्या होगा?

    शिक्षक इस मुद्दे को राज्य सरकार तक ले जाने के लिए तैयार हैं। अगर प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना है। इस आंदोलन से जीएमसी की भर्ती प्रक्रिया और भविष्य के पदोन्नति मामलों पर दबाव बढ़ेगा।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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