भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल (एम्स) इन दिनों एक नए विवाद के केंद्र में है। परिसर में आयोजित इफ्तार पार्टी को लेकर हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मामला इतना बढ़ गया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने न केवल प्रदर्शन किया, बल्कि शुद्धि के नाम पर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में धार्मिक गतिविधियों को लेकर बहस छेड़ दी है।
पूरा मामला एम्स परिसर में आयोजित एक इफ्तार पार्टी से जुड़ा है। हिंदू संगठनो का अरोप है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में इस्लामी धार्मिक आयोजन की अनुमति दी गई, यह गलत है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े स्थानों को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष रहना चाहिए, ताकि सभी समुदायों के लोगों में विश्वास बना रहे। सोमवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एम्स के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए। उन्होंने जोरदार नारेबाजी की और हाथों में पोस्टर लेकर विरोध जताया।
हिंदू संगठनों ने नवरात्रि के दौरान भोपाल एम्स परिसर में कन्या पूजन और हनुमान चालीसा पाठ किया। उन्होंने कहा कि परिसर की शुद्धि के लिए धार्मिक पाठ कराया गया है। भले ही प्रशासन ने तीन नंबर गेट बंद कर दिया, लेकिन कुछ बजरंगी अंदर पहुंचकर पाठ कर रहे हैं। गेट के बाहर यहां भी सामूहिक पाठ किया जा रहा है।
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प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता हाथों में पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर लिखा था, “जिहाद बंद करो”, “अस्पतालों का इस्लामीकरण बंद हो” और “इस्लामी जिहाद का विरोध करो”। बताया जा रहा है कि प्रशासन द्वारा गेट बंद किए जाने के बावजूद कुछ कार्यकर्ता परिसर के अंदर पहुंचने में सफल रहे और वहां धार्मिक अनुष्ठान किए। वहीं, बाहर भी बड़ी संख्या में लोग सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते रहे।
प्रदर्शनकारियों ने एम्स प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब रामनवमी, नवरात्रि जैसे हिंदू त्योहारों पर विशेष आयोजनों की अनुमति नहीं दी जाती, तो इफ्तार पार्टी कैसे आयोजित की गई। इस मुद्दे ने धार्मिक संतुलन और संस्थानों की निष्पक्षता को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी एक धर्म विशेष के कार्यक्रम से अन्य समुदायों में असंतोष पैदा हो सकता है।
हिंदू संगठनों के नेताओं ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि भविष्य में एम्स परिसर में किसी भी धार्मिक आयोजन की अनुमति न दी जाए। उनका कहना है कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का स्वास्थ्य संस्थान है, जहां हर धर्म और वर्ग के लोग इलाज के लिए आते हैं। उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि संस्थान की गरिमा को बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू किए जाएं।
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स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को होने से रोका। हालांकि कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण जरूर रहा, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते स्थिति नियंत्रण में बनी रही।
अब तक इस पूरे मामले में एम्स प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक, आंतरिक स्तर पर मामले की जांच की जा रही है।