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इंदौर:धार भोजशाला विवाद, 3 मई को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई; मुस्लिम पक्ष ने रखे तर्क

धार स्थित भोजशाला को लेकर चल रहे लंबे विवाद में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। 1 मई 2026 को इंदौर खंडपीठ में होने वाली सुनवाई में याचिका क्रमांक 10497 के तहत मामला उठाया गया। याचिका में भोजशाला पर पूर्ण रूप से हिंदू समाज के अधिकार की मांग की गई है। मामले को लेकर दोनों पक्षों की दलीलों और मांगों ने इसे और संवेदनशील बना दिया है।
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धार भोजशाला विवाद, 3 मई को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई; मुस्लिम पक्ष ने रखे तर्क

धार। याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के नेतृत्व में दायर की गई थी। मामले में कई सरकारी और सामाजिक संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट ने वैज्ञानिक सर्वे के आदेश भी दिए हैं। करीब 98 दिनों तक सर्वे प्रक्रिया चली जिसमें दोनों पक्ष मौजूद रहे।

याचिका में उठाई गई प्रमुख मांगें

यह याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के टीम लीडर हरिशंकर जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन के नेतृत्व में दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं में रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग और सुनील सारस्वत शामिल हैं। मामले में प्रतिवादी के रूप में भारत संघ, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), भोपाल के अधीक्षण पुरातत्व अधिकारी, धार के पुरातत्व अधिकारी, मध्यप्रदेश शासन, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक धार, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी और महाराजा भोज सेवा संस्थान समिति को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में प्रमुख रूप से भोजशाला पर हिंदू समाज के पूर्ण आधिपत्य की मांग की गई है। इसके साथ ही लंदन से मां वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा लाकर गर्भगृह में स्थापित करने, नमाज बंद करने और पूरे वर्ष बिना शर्त पूजा-अर्चना, हवन-आरती की अनुमति देने की मांग भी शामिल है।

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2022 से 2024 तक कई बार हुई सुनवाई

इस मामले में 11 मई 2022, 7 जुलाई 2022, 7 फरवरी 2023, 13 जून 2023, 23 जनवरी 2024, 19 फरवरी 2024 और 11 मार्च 2024 को सुनवाई हो चुकी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पार्थ यादव (नई दिल्ली) और विनय जोशी (इंदौर) ने हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में पैरवी की। 5 फरवरी 2024 को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वे की मांग की। 19 फरवरी 2024 को बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और 11 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने के आदेश दिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सर्वे में आधुनिक तकनीकों जैसे जीपीएस, जीपीआर, कार्बन डेटिंग का उपयोग किया जाए, साथ ही 50 मीटर क्षेत्र तक उत्खनन, कलर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की जाए। सर्वे 6 सप्ताह में पूरा कर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया।

98 दिनों तक चला सर्वे, दोनों पक्ष रहे मौजूद

एएसआई के अपर महानिदेशक प्रो. आलोक त्रिपाठी ने 20 मार्च 2024 को जानकारी दी कि 22 मार्च से सर्वे शुरू होगा। इसके बाद बिना किसी छुट्टी के करीब 98 दिनों तक सर्वेक्षण चला। इस दौरान हिंदू पक्ष से गोपाल शर्मा और आशीष गोयल, जबकि मुस्लिम पक्ष से अब्दुल समद खान मौजूद रहे। सर्वे की पूरी प्रक्रिया पर दोनों पक्षों की नजर रही और इसे निष्पक्ष बनाए रखने का प्रयास किया गया। लंबे समय तक चले इस सर्वे ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सभी की नजर कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।

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ये हैं सर्वे के मुख्य बिंदु

इन पॉइन्ट्स पर सर्वे किया गया पूरे भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे और उत्खनन। जीपीएस, जीपीआर और कार्बन डेटिंग तकनीक का उपयोग। बाउंड्री से 50 मीटर तक क्षेत्र का परीक्षण। एएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी। पूरे सर्वे की वीडियोग्राफी। बंद कमरों, स्तंभों और खुले परिसर का विस्तृत अध्ययन किया गया। इन सभी बिंदुओं के आधार पर तैयार रिपोर्ट को कोर्ट में पेश किया जाना है। इससे विवाद के समाधान की दिशा में अहम आधार मिलने की उम्मीद है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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