Bhojshala Dispute :सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर, हाईकोर्ट में बहस जारी

धार के भोजशाला केस में शुक्रवार को भी हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई जारी रही। इस दौरान सीनियर काउंसल एके चितले के तर्क आंशिक रूप से सुने गए। केस में 18 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी।
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सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर, हाईकोर्ट में बहस जारी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भोजशाला विवाद से जुड़े बहुचर्चित मामलों की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को महत्वपूर्ण बहस हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता एके चितले ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखा, हालांकि उनकी बहस पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल 2026 को निर्धारित की है।

    भोजशाला का उपयोग हिंदू-मुस्लिम धार्मिक रूप से करते हैं

    हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और कुलदीप तिवारी की बहस के बाद, आवेदक अंतर सिंह यादव, अनवर हुसैन, मजरुल्ला खान, नंदराम परमार, पुरुषोत्तम हिरवले, रामनारायण धाकड़ और रियाज मोहम्मद खान (सभी निवासी धार) की ओर से प्रस्तुत याचिका (डब्ल्यूपी/6514/2013) में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने अपने तर्क रखे। चितले ने न्यायालय को बताया कि भोजशाला एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है, जिसका उपयोग हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा धार्मिक रूप से किया जाता रहा है। उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने की स्थिति में कई बार तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई है।

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    उच्च स्तरीय समिति गठन की मांग

    याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट से मांग की गई कि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न हो, इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति या आयोग का गठन किया जाए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक विधायी प्रावधान एवं स्पष्ट नियम बनाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    संविधान की खूबसूरती सभी धर्मों के साथ चलने में

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका अन्य मामलों से अलग है, जिसमें सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की बात कही गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय संविधान की खूबसूरती यही है कि सभी धर्मों को साथ लेकर चला जाता है। बेंच ने स्पष्ट किया कि वह सभी पक्षों को सुनना चाहती है और सुनवाई लगातार जारी रखी जाएगी।

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    इंटरवीनर को लेकर कोर्ट सख्त

    सुनवाई के दौरान जब एक इंटरवीनर ने बहस की अनुमति मांगी, तो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह मंच ऐसा नहीं है जहां कोई भी अपनी मांग लेकर आ जाए। यदि याचिका में पर्याप्त आधार (सब्सटेंस) नहीं होगा, तो उसे नहीं सुना जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले सभी पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी, उसके बाद ही इंटरवीनर को मौका दिया जाएगा।

    एएसआई और अन्य पक्षों को भी पक्ष रखने का निर्देश

    अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वकील सुनील जैन को भी निर्देश दिया कि वे पक्षकार होने के नाते अपनी रिपोर्ट और पक्ष प्रस्तुत करें। मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की बड़ी टीम मौजूद रही। एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह सहित कई वकीलों ने पक्ष रखा। वहीं विभिन्न याचिकाओं में हस्तक्षेपकर्ताओं (इंटरवीनर्स) की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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    कई याचिकाओं की एक साथ सुनवाई

    भोजशाला विवाद से जुड़े इस प्रकरण में कई याचिकाएं और अपीलें एक साथ सुनी जा रही हैं। इन सभी में विवाद के अलग-अलग पहलुओं पर बहस जारी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ अधिवक्ता ए.के. चितले अपनी बहस आगामी सुनवाई में जारी रखेंगे। 18 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में मामले की दिशा तय करने वाले अहम तर्क सामने आने की संभावना है।

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    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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