जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने कुख्यात नक्सली लीडर पापाराव उर्फ मंगू ने आखिरकार हथियार डाल दिए हैं। करीब 25 लाख रुपए का इनामी यह नक्सली अपने 18 साथियों के साथ आधिकारिक रूप से पुलिस के सामने सरेंडर कर चुका है।
बताया जा रहा है कि, यह वही पापाराव है जो कई बड़े नक्सली हमलों में शामिल रहा और कई बार पुलिस के एनकाउंटर से भी बच निकलने में सफल रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह सरेंडर बस्तर में नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे क्षेत्र में माओवाद के कमजोर पड़ने की उम्मीद और मजबूत हुई है।
जानकारी के अनुसार, एक दिन पहले पापाराव अपने 18 साथियों के साथ जंगल से निकलकर कुटरू थाने पहुंचा था। यहां सभी नक्सलियों ने पुलिस के सामने हथियार सौंप दिए थे। बुधवार 25 मार्च को जगदलपुर के शौर्य भवन में आयोजित कार्यक्रम में सभी नक्सलियों का आधिकारिक आत्मसमर्पण कराया गया।
इस मौके पर छत्तीसगढ़ के DGP अरुण देव गौतम, बस्तर के IG सुंदरराज और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। जानकारी के मुताबिक, सरेंडर करने वाले नक्सलियों में ओडिशा के 5 नक्सली भी शामिल हैं।
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पापाराव उर्फ मंगू (56) छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वह लंबे समय से नक्सल संगठन में सक्रिय था और कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुका था। वह वर्तमान में DKSZCM (दक्षिण बस्तर जोनल कमेटी) का सदस्य था। इसके साथ ही वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य भी रहा है।
पापाराव के पास हमेशा AK-47 राइफल रहती थी और वह बस्तर के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों का गहरा जानकार था। यही वजह रही कि कई बार सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बावजूद वह एनकाउंटर से बच निकलता था।
विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पापाराव का सरेंडर नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका है। दरअसल पिछले कुछ समय में बस्तर में कई बड़े नक्सली नेता मारे गए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। पापाराव के सरेंडर के बाद पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गई है। इससे पहले बस्तर में बटालियन नंबर-1 के कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया था। इसके बाद पापाराव ही एक ऐसा सक्रिय और लड़ाकू नक्सली बचा था। अब उसके आत्मसमर्पण के बाद माना जा रहा है कि बस्तर में माओवाद की जड़ें काफी कमजोर हो चुकी हैं।
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पिछले एक साल में सुरक्षा बलों ने बस्तर में कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं, जिनमें नक्सल संगठन को भारी नुकसान हुआ है। कई बड़े नक्सली नेता एनकाउंटर में मारे गए और कई ने हथियार डाल दिए।
पिछले एक साल की प्रमुख घटनाएं
|
घटना |
संख्या |
|
पुलिस-नक्सली मुठभेड़ |
99 |
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एनकाउंटर में मारे गए नक्सली |
256 |
|
गिरफ्तार नक्सली |
884 |
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सरेंडर करने वाले नक्सली |
1562 |
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बरामद हथियार |
645 |
|
बरामद IED |
875 |
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शहीद जवान |
23 |
|
नागरिकों की हत्या |
46 |
इन आंकड़ों से साफ है कि, बस्तर में नक्सल संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कवर्धा में जानकारी देते हुए बताया कि कुल 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 10 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं। सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने पुलिस को कई हथियार भी सौंपे हैं।
बरामद हथियार
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हथियार |
संख्या |
|
AK-47 |
8 |
|
SLR |
1 |
|
INSAS |
1 |
|
अन्य हथियार |
कई |
इन हथियारों का इस्तेमाल पहले कई नक्सली वारदातों में किया जा चुका है।
पिछले डेढ़ साल में सुरक्षा बलों ने कई बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया है।
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नक्सली नेता |
पद |
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माड़वी हिड़मा |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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बसवाराजू |
महासचिव, पोलित ब्यूरो |
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जयराम उर्फ चलपति |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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विवेक उर्फ प्रयाग मांझी |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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नरसिम्हा चालम उर्फ गौतम |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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गजरला रवि |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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मोडेम बालकृष्णन उर्फ भास्कर |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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सहदेव सोरेन उर्फ प्रयाग |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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राजू उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
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कोसा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी |
सेंट्रल कमेटी मेंबर |
इन बड़े नेताओं के मारे जाने या आत्मसमर्पण करने से नक्सल संगठन को भारी झटका लगा है।
जानकारी के मुताबिक, बस्तर में नक्सल संगठन के कमजोर होने के पीछे कई कारण हैं-
इन कारणों से कई नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने लगे हैं।
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छत्तीसगढ़ सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाती हैं। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, पापाराव जैसे बड़े नक्सली नेता का सरेंडर बस्तर में शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। अब क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां काफी कम हो चुकी हैं और आने वाले समय में बस्तर को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।