बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ में यह केस दोबारा खुल गया है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई, जिसमें सतीश जग्गी भी मौजूद रहे। यह मामला साल 2003 का है जब NCP नेता की हत्या की गई थी।
सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने मामले की आखिरी सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे साफ है कि अब इस केस पर मेरिट के आधार पर विस्तृत बहस होगी। दरअसल, करीब दो साल पहले इसी डिवीजन बेंच ने रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील खारिज कर दी थी और निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद CBI ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया, ताकि केस की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई हो सके। अब इस पुनः सुनवाई से मामले में नए पहलुओं पर चर्चा और संभावित कानूनी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। यह केस लंबे समय से प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल रहा है, ऐसे में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
यह भी पढ़ें: मैं अपनी पसंद की लड़की से ही शादी करूंगा... सरगुजा में जिद पूरी करने 40 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर पर चढ़ा युवक
राम अवतार जग्गीहत्याकांड केस में अब फिर से सुनवाई शुरू होने के बाद पुराने मामला एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। बता दें मामला 4 जून 2003 का है, जब NCP की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस हत्याकांड में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। ट्रायल के दौरान अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।
हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इस दौरान अमित जोगी के पक्ष में स्टे भी मिला, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामला दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया।
हाईकोर्ट में अपील के दौरान सतीश जग्गी की ओर से उनके वकील बीपी शर्मा ने गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि यह हत्या तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने जांच शुरू की, तब प्रभाव के चलते कई अहम सबूत नष्ट कर दिए गए।
ऐसे मामलों में केवल भौतिक सबूत ही नहीं, बल्कि पूरे षड्यंत्र को समझना जरूरी है, इसलिए आरोपियों को सिर्फ सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
राम अवतार जग्गी बिजनेस पृष्ठभूमि से जुड़े थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचंद्रन शुक्ला के बेहद करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए, तो जग्गी भी उनके साथ चले गए। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।
इस मामले में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।