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गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान अंतरिक्ष यात्री बनने की उनकी बहादुरी और अदम्य हिम्मत के लिए दिया। शुभांशु भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए, जिन्हें शांति काल का वीरता पुरस्कार और अशोक चक्र दोनों मिले।
शुभांशु शुक्ला की यात्रा दिखाती है कि हिम्मत केवल युद्ध के मैदान के लिए नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों के लिए भी जरूरी है। लखनऊ के एक आम युवा से लेकर अंतरिक्ष मिशन तक की उनकी कहानी भारत के अंतरिक्ष सपनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राकेश शर्मा की उड़ान के 41 साल बाद, शुभांशु की सफलता ने नई उम्मीदें और प्रेरणा पैदा की है। यह सम्मान न केवल उनकी स्किल की पहचान करता है, बल्कि अंतरिक्ष में इंसानी सीमाओं को आगे बढ़ाने की हिम्मत को भी सराहता है।
लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला ने 17 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने कारगिल युद्ध और IAF एयरशो से प्रेरित होकर, एक दोस्त के फॉर्म का इस्तेमाल करके नेशनल डिफेंस एकेडमी के लिए अप्लाई किया।
साल 2006 में शुभांशु शुक्ला IAF में फाइटर पायलट बने। उन्होंने Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे जेट पर 2,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी। इसके बाद वे टेस्ट पायलट और कॉम्बैट लीडर बने। उन्होंने IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री भी हासिल की।
साल 2019 में उन्हें ISRO ने गगनयान मिशन के लिए चुना। इसके बाद उन्होंने रूस के यूरी गगारिन सेंटर में ट्रेनिंग ली और NASA और ISRO के सेशंस में भी हिस्सा लिया। उन्हें इस प्रोग्राम के चार फाइनल उम्मीदवारों में से एक चुना गया।