नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सशस्त्र बलों के कुल 70 रणबांकुरों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किये जाने की मंजूरी दी। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र के साथ गगनयान मिशन के लिए चुने गए वायु सेना के पायलट ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को भी कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जाएगा।
ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने पहले भारतीय के रूप में 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाकर इतिहास रचा था। ग्रुप कैप्टन शुक्ला को चार सदस्यों वाले भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए भी चुना गया है। उन्होंने 18 दिन की अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा के दौरान विभिन्न शोध कार्यो में योगदान दिया था। अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है जो सैनिकों और नागरिकों को असाधारण बहादुरी, साहस या सर्वोच्च बलिदान के लिए दिया जाता है।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का जन्म 10 अक्टूबर, 1985 को लखनऊ में हुआ था। वे भारतीय वायु सेना के एक टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास 2,000 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव है। 2019 में ISRO के गगनयान मिशन के लिए चुने जाने के बाद, उन्होंने रूस के यूरी गागारिन अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया। 2024 में, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक्सिओम मिशन 4 का संचालन करने के लिए चुना गया, जिससे वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए।
26 जून 2025 को शुभांशु शुक्ला ने अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से SpaceX के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए उड़ान भरी। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का भी प्रतीक था। ISS पर रहने के दौरान उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिससे भविष्य के भारतीय मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण डेटा और अनुभव प्राप्त हुआ। अंतरिक्ष में जाने वाले वे दूसरे भारतीय हैं। उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा सोवियत संघ के मिशन के तहत अंतरिक्ष गए थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने का गौरव शुभांशु शुक्ला को ही है। यह उपलब्धि भारत की तकनीकी प्रगति और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।