सुप्रीम कोर्ट सख्त :NCERT किताब विवाद केस में कहा-डोमेन एक्सपर्ट कमेटी बनाए केंद्र सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) किताब विवाद केस में केंद्र सरकार को डोमेन एक्स्पर्ट कमेटी के गठन करने को कहा है। कोर्ट ने सात दिन में डोमेन विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने को कहा है।
NCERT किताब विवाद केस में कहा-डोमेन एक्सपर्ट कमेटी बनाए केंद्र सरकार
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की किताबों से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को विशेषज्ञों की एक समिति (डोमेन एक्स्पर्ट कमेटी) गठित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और अध्ययन के लिए एक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए, जिसमें एक पूर्व न्यायाधीश, एक शिक्षाविद् और कानून के क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ को शामिल किया जाए। कोर्ट का मानना है कि शिक्षा से जुड़े संवेदनशील विषयों पर विशेषज्ञों की राय बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में पाठ्यक्रम को लेकर किसी तरह का विवाद न हो।

    नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी से भी ली जाएगी सलाह 

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका सहित हर संस्था में सुधार की संभावना रहती है और यदि कमियों की ओर ध्यान दिलाया जाता है तो इससे भविष्य के न्यायाधीशों और वकीलों को सीखने का मौका मिलता है। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए। साथ ही कानूनी अध्ययन से जुड़ी सामग्री तैयार करने के लिए भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी से भी परामर्श लिया जाए, ताकि पाठ्यक्रम तथ्यात्मक और संतुलित बनाया जा सके।

    तीन विशेषज्ञों को पाठ्यक्रम निर्माण से दूर रखें 

    सुप्रीम कोर्ट ने विवादित कक्षा 8 के अध्याय से जुड़े तीन विशेषज्ञों मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार को फिलहाल स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया से अलग रखने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि संबंधित विशेषज्ञ अदालत के आदेश में किसी तरह का संशोधन चाहते हैं, तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट से संपर्क कर सकते हैं।

    न्यायपालिका को बदनाम करने वालों पर कार्रवाई के संकेत

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ की जा रही अभद्र टिप्पणियों पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान की जाए, जो न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसे लोगों को सबक सिखाना जरूरी है। मैं बतौर सीजेआई ऐसे लोगों को छोड़ने वाला नहीं हूं। न्यायापालिका को बदनाम करने वालों ने अब तक बिना शर्त माफी मांगी या नहीं ये भी देखना होगा। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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