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Umaria : वन्यजीवों को केनाइन वायरस से बचाने के लिए तैयारी तेज, 1500 से ज्यादा आवारा कुत्तों का होगा टीकाकरण

यह अभियान केवल टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे गांवों और आसपास के इलाकों में चिन्हित किए गए 1500 से अधिक आवारा कुत्तों को भी इसमें शामिल किया गया है।
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वन्यजीवों को केनाइन वायरस से बचाने के लिए तैयारी तेज, 1500 से ज्यादा आवारा कुत्तों का होगा टीकाकरण

उमरिया। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के खतरे को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने 1500 से अधिक आवारा कुत्तों के टीकाकरण की तैयारी पूरी कर ली है। वैक्सीन की खेप पहुंचते ही अगले एक-दो दिनों में यह विशेष अभियान शुरू कर दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बाघों समेत अन्य वन्यजीवों को खतरनाक संक्रमण से बचाना है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और उससे सटे गांवों में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते हैं। वन विभाग के अनुसार, यही कुत्ते केनाइन डिस्टेंपर वायरस के वाहक बन सकते हैं। यदि संक्रमित कुत्तों का संपर्क वन्यजीवों से होता है तो यह वायरस जंगल के जानवरों तक पहुंच सकता है। इसी खतरे को रोकने के लिए रिजर्व प्रबंधन ने व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।

क्या है केनाइन डिस्टेंपर वायरस?

केनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों को प्रभावित करती है। यह वायरस श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर डालता है। कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संक्रमण जंगली मांसाहारी जीवों जैसे बाघ, तेंदुआ, सियार और अन्य वन्यजीवों तक भी फैल सकता है।

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क्यों जरूरी है यह अभियान?

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी टाइगर रिजर्व में संक्रमण फैलने की स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। यदि वायरस जंगल के बाघों या अन्य वन्यजीवों तक पहुंच गया तो इससे उनके स्वास्थ्य और संरक्षण पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। बांधवगढ़ देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है, इसलिए यहां संक्रमण की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

कौन-कौन से क्षेत्र होंगे प्रभावित?

यह अभियान केवल टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे गांवों और आसपास के इलाकों में चिन्हित किए गए 1500 से अधिक आवारा कुत्तों को भी इसमें शामिल किया गया है। वन विभाग का मानना है कि संक्रमण रोकने के लिए पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित करना जरूरी है।

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पांच सदस्यीय टीम संभालेगी जिम्मेदारी

अभियान को सफल बनाने के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई है। टीम के सदस्यों को कुत्तों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने और टीकाकरण करने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। टीकाकरण के बाद प्रत्येक कुत्ते के गले में पहचान पट्टा लगाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसे वैक्सीन लग चुकी है।

बूस्टर डोज भी दी जाएगी

बीटीआर प्रबंधन ने केवल शुरुआती टीकाकरण तक अभियान को सीमित नहीं रखा है। सभी चिन्हित कुत्तों को निर्धारित समय पर बूस्टर डोज भी दी जाएगी, जिससे उन्हें लंबे समय तक वायरस से सुरक्षा मिल सके। क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के अनुसार सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और वैक्सीन पहुंचते ही अभियान शुरू कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह पहल बांधवगढ़ के बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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