लसूड़िया के बाद अब बाणगंगा पुलिस के सीसीटीवी सामने:आधी रात घर पहुंची पुलिस, “समझौता करो वरना केस होगा”

इंदौर – इन दिनों शायद इंदौर पुलिस की साढ़े साती चल रही हैं। क्योंकि पहले लसूड़ीया थाने में एक रिटायर पुलिस अधिकारी के कहने पर एक वारंट तामिल करवाने के लिए घर के बाहर पहुचे पुलिस जवान का जो वीडियो वाइरल हुआ जिसने इंदौर पुलिस छवि को पूरी तरह से धूमिल कर दिया लेकिन आज कल वही पैतरा बाणगंगा पुलिस भी अपना रही हैं। घर बाहर घंटों खड़े रह कर अपना काम करवाने की युक्ति समझ से पूरी तरह से परे हैं। लेकिन जब घटना सीसीटीवी में कैद होतो किसी को कुछ भी कहने की व बताने की जरूरत नहीं हैं।

बाणगंगा क्षेत्र के रहने वाले 64 वर्षीय जसराज मेहता ने पुलिस पर परेशान करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने वकील के जरिए पुलिस कमिश्नर और डीसीपी जोन-3 को नोटिस भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी लेकिन जब समसस्या का कोई हल नहीं निकला तो फरियादी ने हाई कोर्ट की शरण ली हैं।
जसराज मेहता का कहना है कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ झूठी शिकायत की है। शिकायत में अवैध कॉलोनाइजेशन का आरोप लगाया गया है, जबकि उनका कहना है कि बाणगंगा क्षेत्र में उनके नाम कोई जमीन ही नहीं है।उन्होंने बताया कि पुलिस ने बयान के लिए उन्हें कई बार थाने बुलाया। वे तीन बार थाने पहुंचे, लेकिन उनका बयान दर्ज नहीं किया गया। उनका आरोप है कि इस दौरान उन पर दबाव बनाया गया और मानसिक रूप से परेशान किया गया।

जसराज मेहता ने यह भी कहा कि कई बार मांगने के बावजूद उन्हें शिकायत की कॉपी नहीं दी गई। इससे उन्हें यह तक पता नहीं चल पाया कि आखिर उन पर क्या आरोप लगाए गए हैं।नोटिस में कुछ लोगों के नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि वे पुलिस के साथ मिलकर उन्हें परेशान कर रहे हैं। वहीं थाना बाणगंगा के कुछ पुलिसकर्मियों पर भी पक्षपात करने के आरोप लगाए गए हैं।
बेटी के प्लॉट पर अवैध कब्जा
जसराज मेहता ने यह भी दावा किया है कि उनकी बेटी के प्लॉट पर अवैध कब्जा किया गया है। इस मामले में वे अलग से कानूनी कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।वकील की ओर से भेजे गए नोटिस में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए। लेकिन पुलिस की और से जब कोई उचित कार्यवाई नहीं हुई तो फरियादी ने कोर्ट की शरण ली हैं।
अपनी सेल्फ़ी खिच कर अधिकारी को बताने के लिए कि वो स्पॉट पर गया था
याचिका दायर
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर बाणगंगा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का कहना है कि पुराने जमीन विवाद के नाम पर पुलिस उन्हें लगातार परेशान कर रही है और समझौते के लिए दबाव बना रही है। याचिका के अनुसार किसी अज्ञात व्यक्ति ने 15 से 20 साल पुराने कथित प्लॉट बिक्री मामले में शिकायत की थी। जबकि किसान का दावा है कि उन्होंने कभी कोई प्लॉट बेचा ही नहीं। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें कई बार थाने बुलाया। किसान ने अदालत को बताया कि वह तीन बार खुद बयान देने थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने बयान दर्ज करने के बजाय समझौता करने और पैसे लौटाने का दबाव बनाया। उनका आरोप है कि पुलिस कुछ लोगों का पक्ष लेकर काम कर रही है।
आठ पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे
याचिका में कहा गया है कि 2 अप्रैल 2026 को थाना पहुंचने पर यह कहकर बयान नहीं लिया गया कि थाना प्रभारी छुट्टी पर हैं। इसके बाद उनसे समय मांगने का आवेदन लिखवाया गया। फिर 19 अप्रैल को दोबारा बुलाया गया, लेकिन तब भी बयान दर्ज नहीं किया गया। सबसे गंभीर आरोप 20 अप्रैल की रात का है। किसान के मुताबिक रात करीब 12 बजे आठ पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और कहा कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उन्हें गिरफ्तार करने आए हैं। जबकि उस समय तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। किसान ने दावा किया कि पूरी घटना घर के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है। किसान ने यह भी बताया कि वह बुजुर्ग हैं और कई बीमारियों से परेशान हैं, इसके बावजूद पुलिस द्वारा लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। मामले में उन्होंने पुलिस आयुक्त और डीसीपी को भी शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वर्जन – अधिवक्ता अजय मिश्रा ने बताया कि इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका पक्षकार बयान देने के लिए स्वयं थाने जा रहा था, लेकिन उसका बयान दर्ज करने के बजाय टीआई सियाराम गुर्जर द्वारा पुलिसकर्मियों को भेजकर उसे डराने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि पुलिस यह दावा करती है कि वे सिर्फ एक बार वहां गए थे, तो उनके पास लगातार तीन दिनों के सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। फुटेज में पुलिसकर्मी कभी रात 1 बजे तो कभी 2 बजे घर के बाहर आते-जाते दिखाई दे रहे हैं।











