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भोपाल:सड़क हादसों की होगी ‘क्राइम सीन’ जैसी जांच, हर एक्सीडेंट की तलाशे जाएंगे असली कारण

राजधानी भोपाल में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अब नया एक्शन प्लान लागू करने जा रही है। अब सड़क दुर्घटनाओं की जांच सिर्फ एफआईआर तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि हर हादसे की ‘क्राइम सीन’ की तरह तकनीकी और जमीनी जांच की जाएगी।
सड़क हादसों की होगी ‘क्राइम सीन’ जैसी जांच, हर एक्सीडेंट की तलाशे जाएंगे असली कारण
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सतीश उपाध्याय, भोपाल। राजधानी भोपाल में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अब नया एक्शन प्लान लागू करने जा रही है। अब सड़क दुर्घटनाओं की जांच सिर्फ एफआईआर तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि हर हादसे की ‘क्राइम सीन’ की तरह तकनीकी और जमीनी जांच की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीम दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर यह पता लगाएगी कि हादसा आखिर क्यों हुआ और भविष्य में उसे कैसे रोका जा सकता है। हर दुर्घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसमें यह स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे चालक की गलती थी, सड़क डिजाइन की खामी, ट्रैफिक सिस्टम की कमी या कोई अन्य तकनीकी वजह जिम्मेदार थी।

पुलिस कमिश्नर संजय कुमार की नई पहल

संजय कुमार ने शहर में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और मौतों को देखते हुए यह पहल शुरू की है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी गंभीर सड़क हादसे के तुरंत बाद जांच अधिकारी ट्रैफिक जोन प्रभारी या एसीपी के साथ मौके पर पहुंचकर तकनीकी निरीक्षण करें। जांच के दौरान सड़क की स्थिति, ट्रैफिक मूवमेंट, कट-पॉइंट, मोड़, सिग्नल, रोशनी, सड़क की चौड़ाई और वाहनों की स्पीड समेत कई पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

पुलिस का फोकस: सिर्फ तेज रफ्तार नहीं, सड़क की खामियां भी

पुलिस का मानना है कि हर हादसे के पीछे सिर्फ लापरवाह ड्राइविंग जिम्मेदार नहीं होती। कई मामलों में खराब ट्रैफिक इंजीनियरिंग, अव्यवस्थित रोड डिजाइन और कमजोर ट्रैफिक मैनेजमेंट भी बड़ी वजह बनते हैं। भोपाल में पुराने रोड नेटवर्क, तेजी से बढ़ते वाहनों का दबाव, अनियोजित कट, मिश्रित ट्रैफिक और कमजोर ट्रैफिक सिस्टम के कारण दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

इन खामियों की होगी विशेष जांच

नई जांच प्रणाली में उन सभी तकनीकी कमियों पर फोकस रहेगा, जो सड़क हादसों को बढ़ावा देती हैं। इनमें शामिल हैं:

  • ब्लैक स्पॉट जहां बार-बार हादसे होते हैं
  • ब्लाइंड कर्व और अचानक मोड़
  • गलत ढलान और संकरी सड़कें
  • अनियोजित यू-टर्न और कट
  • सिग्नल टाइमिंग की गड़बड़ी
  • स्ट्रीट लाइट और विजिबिलिटी की कमी
  • फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग का अभाव
  • हाईवे और शहर के ट्रैफिक का मिश्रण
  • अवैध पार्किंग और अतिक्रमण
  • खराब रोड मेंटेनेंस

डेटा और तकनीक से तय होगी सड़क सुरक्षा

नई व्यवस्था में सड़क सुरक्षा ऑडिट, ब्लैक स्पॉट एनालिसिस, इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम (ITS), कैमरा आधारित मॉनिटरिंग और डेटा बेस्ड सिग्नल मैनेजमेंट जैसे उपायों पर भी जोर दिया जाएगा। पुलिस का लक्ष्य ऐसी ‘फॉरगिविंग रोड’ विकसित करना है, जहां चालक की छोटी गलती भी जानलेवा हादसे में न बदले।

जनभागीदारी से भी होंगे सुधार

दुर्घटना जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे पुलिस कमिश्नर के सामने पेश किया जाएगा। इसके बाद नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर खामियों को दूर किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर छोटे सुधार कार्य जनभागीदारी से भी कराए जाएंगे।

विशेषज्ञ बोले- सिर्फ चालान से नहीं रुकेंगे हादसे

ट्रैफिक नियम और इंजीनियरिंग विशेषज्ञ एवं रिटायर्ड एडिशनल एसपी विजय डेविड का कहना है कि भोपाल जैसे शहरों में सिर्फ चालान काटने या पुलिसिंग बढ़ाने से हादसे कम नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि बेहतर रोड डिजाइन, वैज्ञानिक ट्रैफिक प्लानिंग, पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों को प्राथमिकता, ब्लैक स्पॉट सुधार और डेटा आधारित इंजीनियरिंग समाधान ही स्थायी उपाय हैं। उनके अनुसार सड़क हादसों की जांच में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वाहन की स्थिति, सड़क की बनावट, स्पीड, ट्रैफिक दबाव और शराब पीकर ड्राइविंग जैसे सभी पहलुओं की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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