Aakash Waghmare
25 Jan 2026
Naresh Bhagoria
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Naresh Bhagoria
25 Jan 2026
Garima Vishwakarma
25 Jan 2026
बालाघाट। Naxal Surrender की बड़ी मिसाल मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में देखने को मिली है। जहां 6 दिसंबर की रात प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण हुआ। लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माने जाने वाले बालाघाट में KB डिवीजन (कान्हा-भोरमदेव) के 10 हार्डकोर नक्सलियों ने सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। यह घटना Naxal Surrender अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
इन नक्सलियों में 77 लाख रुपए का इनामी डिवीजन कमांडर कबीर भी शामिल है, जो तीन राज्यों का मोस्ट वांटेड था। सरेंडर करने वालों में 4 महिलाएं और 6 पुरुष नक्सली हैं। सभी आज सीएम मोहन यादव के सामने औपचारिक रूप से अपने हथियार सौंपेंगे।
बालाघाट जिला लगभग 35 सालों से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की लगातार कार्रवाई और केंद्र सरकार की सख्त रणनीति के चलते यह क्षेत्र धीरे-धीरे नक्सली प्रभाव से मुक्त हो रहा है। मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने की केंद्र सरकार की डेडलाइन के अनुरूप प्रदेश में अभियान तेज किए गए, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने पहले एक फॉरेस्ट गार्ड के माध्यम से संपर्क किया और सरेंडर की इच्छा जताई। इसके बाद हॉक फोर्स की टीम सक्रिय हुई और देर रात लगभग 11 बजे सभी नक्सलियों को बालाघाट के रेंज IG के बंगले में सरेंडर करवाया गया। यहां से उन्हें पुलिस लाइन भेजा गया, जहां पूछताछ और कागजी प्रक्रिया जारी है।
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सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम 77 लाख रुपए का इनामी कबीर उर्फ महेंद्र है। वो एमएमसी जोन और KB डिवीजन का प्रमुख है और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तीनों राज्यों में ये मोस्ट वांटेड था। कबीर का सरेंडर नक्सलवाद के खिलाफ प्रदेश की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।
7 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में सभी नक्सली सीएम मोहन यादव के सामने अपने हथियार सौंपेंगे। पुलिस महकमा पूरी तैयारी में जुटा है और खुद बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
सुरक्षा बलों ने इस वर्ष बालाघाट में 2350 से अधिक एंटी-नक्सल ऑपरेशन चलाए। इस दौरान 8 नक्सली ढेर कि गए, 25 से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया, कई बड़े मॉड्यूल ध्वस्त कर दिए गए। यह सफलता नक्सलवाद की कमजोर होती पकड़ की स्पष्ट निशानी है।
हालांकि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर किया है, लेकिन सेंट्रल कमेटी सदस्य रामधेर अभी भी पुलिस के रडार से बाहर है। उसके साथ लगभग एक दर्जन सक्रिय नक्सली और मौजूद हो सकते हैं। शनिवार को लांजी क्षेत्र में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ भी हुई, जिसके बाद रात में सरेंडर की संख्या और बढ़ गई।