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बालाघाट में रहस्यमयी बीमारी से 7 बच्चों की मौत: बुखार, चकत्ते के लक्षण; पुणे भेजे सैंपल

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में अज्ञात बीमारी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जून के अंत से अब तक कम से कम सात बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि बीमारी की असली वजह अभी सामने नहीं आई है।
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बालाघाट में रहस्यमयी बीमारी से 7 बच्चों की मौत: बुखार, चकत्ते के लक्षण; पुणे भेजे सैंपल
बालाघाट में रहस्यमयी बीमारी से 7 बच्चों की मौत

बालाघाट। प्रभावित बच्चों में बुखार, शरीर पर चकत्ते, खून की कमी, डिहाइड्रेशन और गुर्दे की क्षति जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। बालाघाट के बिरसा विकासखंड के कई गांवों में बीमारी के मामले सामने आए हैं और मरीजों के सैंपल पुणे की लैब भेजे गए हैं। जबलपुर मेडिकल कॉलेज की टीम के साथ स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित बच्चों की जांच कर रहे हैं, वहीं एम्स दिल्ली की टीम भी बालाघाट पहुंची है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर चिकित्सा शिविर लगाने, विशेषज्ञों की टीम भेजने और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

कई गांवों में फैली बीमारी, 7 बच्चों की मौत

बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के अडोरी, मच्छुरदा पंचायत, बोंदारी और कुंडेकसा समेत कई गांवों में बच्चों के बीमार होने के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार 26 जून से 6 अगस्त के बीच बोंदारी और कुंडेकसा गांवों में छह बच्चों की मौत हुई। इनमें 13 वर्षीय लमानिन धुर्वे, एक वर्षीय साहिल धुर्वे, एक वर्ष नौ माह की पूजा धुर्वे, पांच वर्षीय सचिन मरकाम, चार वर्षीय प्रीति मरकाम और चार वर्षीय अरविंद धुर्वे शामिल हैं। इसके बाद सोमवार रात जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तीन वर्षीय बच्ची प्रियंका की भी मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या सात हो गई। बच्ची को 9 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अगले दिन उसकी मौत हो गई।

बुखार और चकत्तों के साथ किडनी पर असर

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित बच्चों में बीमारी के अलग-अलग लक्षण सामने आ रहे हैं। इनमें खून की कमी, शरीर में पानी की कमी, गुर्दे की क्षति, सर्दी, बुखार, एक्जिमा और फंगल संक्रमण शामिल हैं। कई बच्चों के शरीर पर रहस्यमय चकत्ते भी दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण डॉक्टर बीमारी की वजह तलाशने में जुटे हैं। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवींद्र विष्णोई, बाल रोग विशेषज्ञों और स्थानीय चिकित्सा कर्मियों की टीम ने प्रभावित बच्चों की जांच की है। हालांकि अब तक इन सभी लक्षणों के पीछे की बीमारी या संक्रमण का सटीक कारण पता नहीं चल सका है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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पुणे भेजे सैंपल, एम्स दिल्ली की टीम भी पहुंची

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित बच्चों के जैविक नमूने लेकर जांच के लिए पुणे स्थित लैब भेजे गए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग को इन जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद बीमारी की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने तीन वर्षीय प्रियंका की मौत की पुष्टि की और बताया कि बच्ची कई बीमारियों से पीड़ित थी। वहीं मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपल्लव ने छह बच्चों की मौत की जानकारी दी है। इस बीच स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली स्थित एम्स की विशेषज्ञ टीम भी बालाघाट का दौरा कर रही है और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा ले रही है।

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दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

बच्चों की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने आदिवासी बहुल क्षेत्र में बच्चों की मौतों पर गंभीर चिंता जताई और दावा किया कि बिरसा आदिवासी विकासखंड में पिछले एक सप्ताह के दौरान दूषित पानी और संक्रामक बीमारियों के कारण 11 बच्चों की मौत हुई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से अभी सात बच्चों की मौत की पुष्टि की गई है। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ प्रभावित गांवों में भेजने और वहां चिकित्सा शिविर लगाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।

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प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक मदद की मांग

दिग्विजय सिंह ने कहा कि पहले से गरीबी से जूझ रहे आदिवासी परिवार इस स्वास्थ्य संकट के कारण और मुश्किल में हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। साथ ही गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज के लिए नागपुर, रायपुर या भोपाल हवाई मार्ग से ले जाने की मांग भी की है। सिंह ने कहा कि ऐसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार को उठाना चाहिए। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग को पुणे की प्रयोगशाला से आने वाली रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों में सामने आ रहे लक्षणों की असली वजह क्या है और बीमारी से निपटने के लिए आगे किस तरह के इलाज की जरूरत होगी।  

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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