पल्लवी वाघेला, भोपाल। आमतौर पर परिवार में सुलह कराने या संबंधों की पुनर्स्थापना के लिए दंपति ही मध्यस्थता केन्द्र तक पहुंचते हैं। लेकिन इस मामले में एक सास ने अपनी रूठी बहू को मना कर लाने के लिए मध्यस्थता केन्द्र में गुहार लगाई। सास की यह कोशिश रंग भी लाई है और सास की गारंटी पर बहू ससुराल आने राजी हो गई है।
हालांकि, बहू ने शर्त रखी है कि यदि तीन माह रहने के बाद उसे लगेगा कि पति की आदतें सुधर गई हैं तो उसके बाद ही वह पति पर लगाए केस वापस लेगी। मामले में पत्नी ने पति पर शराब के नशे में प्रताड़ित करने और सही तरह से ध्यान न रखने का आरोप लगाया है। वहीं, सास का कहना है कि उसने बेटे को नशा मुक्ति के लिए मोटिवेट किया और अब वह शराब छोड़ चुका है।
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दंपति की शादी को आठ साल हुए हैं। उनका 7 साल का बेटा और करीब चार साल की बेटी भी है। मध्यस्थता केंद्र में दिए आवेदन में सास ने कहा कि उसकी बहू बहुत अच्छी है और सास-बहू के बीच किसी भी तरह का विवाद नहीं है। सास ने कहा कि शादी के वक्त बेटा शराब नहीं पीता था, लेकिन कोविड में जॉब जाने के बाद वह अवसाद में आया और शराब का आदी हो गया।
इसके बाद से ही बेटा-बहू में विवाद शुरू हुए। वहीं, काउंसलिंग में पहुंची बहू ने कहा कि शादी के बाद सब ठीक था। सास हमेशा उसके लिए सपोर्टिव रही हैं। पति से भी विवाद नहीं थे, लेकिन शराब और आर्थिक परेशानियों में पति का एग्रेशन इतना बढ़ गया कि उसके लिए घर में रहना मुश्किल होने लगा था।
उसने कहा कि बच्चों पर भी गलत असर नजर आने लगा था, इसलिए वह घर लौटने तैयार नहीं थी। सास की गारंटी के बाद बहू ने कहा कि सास ने हमेशा उसके लिए मां वाली भूमिका निभाई है और उन्हीं का मान रखने वह घर लौट रही है। उसने कहा कि वो खुद घर तोड़ना नहीं चाहती। तीन माह में यदि पति का व्यवहार सही लगा तो वह केस वापस लेकर अपना संसार बसाना चाहती है।
मामले में पति ने कहा कि परिवार से अलग होने के बाद उसे समझ आया कि परिवार साथ होता तो शायद उसकी स्थिति आज बेहतर होती। उसने कहा कि वह नशे की आदत छोड़ चुका है, लेकिन पत्नी को अब उसपर विश्वास नहीं। ऐसे में उसकी मां ने परिवार को जोड़ने की पहल की है। मध्यस्थता केन्द्र की संचालक प्रतिभा राजगोपाल ने कहा कि मां ने बेहद पॉजिटिव एप्रोच की है और उम्मीद है कि तीन माह बाद भी परिवार साथ ही होगा।