बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती :राष्ट्रपति-PM मोदी समेत अन्य नेताओं ने किया नमन, संसद परिसर में प्रतिमा पर दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर पूरा देश सम्मान और गर्व के भाव में डूबा नजर आया। दिल्ली में संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और पीएम नरेंद्र मोदी, कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य सांसदों ने बाबा साहेब को नमन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री और विपक्ष के बड़े नेता के बीच हुई सहज मुलाकात ने माहौल को और खास बना दिया।
प्रेरणा स्थल पर श्रद्धांजलि, जुटे देश के बड़े नेता
अंबेडकर जयंती के मौके पर दिल्ली स्थित संसद परिसर में बने प्रेरणा स्थल पर देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियां पहुंचीं। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई सांसदों और नेताओं ने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान पूरे परिसर को खास तरीके से सजाया गया था और सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ यहां उमड़ने लगी थी। आम नागरिकों के लिए भी प्रेरणा स्थल के द्वार खोल दिए गए थे, जिससे हजारों लोग यहां पहुंचकर बाबा साहेब को नमन कर सके।
मोदी-खड़गे की मुलाकात
कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मल्लिकार्जुन खड़गे की मुलाकात को लेकर रही। दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की बातचीत और मुस्कुराहट ने यह संकेत दिया कि, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सौहार्द बना हुआ है। दोनों के बीच दिखी सहजता और केमिस्ट्री ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। यह दृश्य खास इसलिए भी रहा क्योंकि आमतौर पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिलती है।
PM मोदी बोले- अंबेडकर आज भी प्रासंगिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि, डॉ. अंबेडकर के प्रयासों ने भारत को मजबूत लोकतांत्रिक आधार दिया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में जोर देते हुए कहा कि अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। उन्होंने सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को देश की ताकत बताया।
राष्ट्रपति का संदेश- आदर्शों को अपनाने का आह्वान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी बाबा साहेब को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि, अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और विचारक भी थे। राष्ट्रपति ने लोगों से अपील की है कि, वे बाबा साहेब के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और एक न्यायपूर्ण व समावेशी समाज के निर्माण में योगदान दें।
अंबेडकर जयंती पर विकास की सौगात
इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन भी करेंगे। यह 6-लेन एक्सप्रेसवे दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय को करीब 6 घंटे से घटाकर सिर्फ ढाई घंटे कर देगा। इस परियोजना से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
देशभर में कार्यक्रम, कर्नाटक में विशेष आयोजन
अंबेडकर जयंती को लेकर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। खासतौर पर कर्नाटक में बीजेपी ने 13 से 20 अप्रैल तक पूरे राज्य में कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करने की घोषणा की है। इन कार्यक्रमों के तहत जिला और तालुका स्तर पर आयोजन किए जाएंगे, जिसमें बाबा साहेब के विचारों और उनके योगदान को लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
अंबेडकर जयंती पर आम जनता की भागीदारी
अंबेडकर जयंती पर केवल नेता ही नहीं, बल्कि आम जनता की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। सुबह से ही लोग प्रेरणा स्थल और अन्य स्थानों पर पहुंचकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दे रहे थे। कई जगहों पर रैलियां, संगोष्ठियां और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। युवाओं और छात्रों में भी खास उत्साह देखने को मिला।
बाबा साहेब के बारे में जानें
डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का मुख्य निर्माता माना जाता है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाज के कमजोर, वंचित और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और उन्हें समानता दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए। उनका जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक मजबूत नींव है।
उनके योगदान को ऐसे समझें-
- संविधान निर्माण में अहम भूमिका - उन्होंने भारत को एक मजबूत, लोकतांत्रिक और अधिकार आधारित संविधान दिया।
- सामाजिक समानता के लिए संघर्ष - जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई और बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए आंदोलन किए।
- शिक्षा पर विशेष जोर - उन्होंने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा हथियार माना और खुद कई उच्च डिग्रियां हासिल कर उदाहरण पेश किया।
- महिलाओं के अधिकारों की पैरवी - महिलाओं को संपत्ति, शिक्षा और बराबरी के अधिकार दिलाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए।
- लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया - स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे सिद्धांतों को भारतीय समाज की नींव बनाया।
- आर्थिक सोच और नीतियां - वे एक कुशल अर्थशास्त्री भी थे, जिन्होंने देश की आर्थिक नीतियों और विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार दिए।
- श्रमिकों और किसानों के अधिकार - मजदूरों के काम के घंटे तय करने, न्यूनतम वेतन और श्रमिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम किया।
- धर्म और समाज सुधार - उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और अंत में बौद्ध धर्म अपनाकर समानता का संदेश दिया।











