ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
यमन में सक्रिय ईरान समर्थित ने युद्ध के तीसरे सप्ताह में अपनी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने कहा कि उनकी सेना पूरी तरह तैयार हैं और “ट्रिगर पर उंगली” रखे हुए हैं। उनका कहना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो वे सीधे संघर्ष में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ईरान की संभावित तीन-स्तरीय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पहले चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित करना, दूसरे चरण में लेबनान और गाजा के मोर्चों से इजरायल पर दबाव बनाना और तीसरे चरण में हूती विद्रोहियों के जरिए बाब अल-मंडेब को बंद करना शामिल है।
यह भी पढ़ें: ईरान की आर्थिक लाइफलाइन पर खतरा! अमेरिका ने खार्ग आइलैंड पर बरसाए बम, जानें क्यों इतना अहम है यह द्वीप
बाब अल-मंडेब का अर्थ “आंसुओं का द्वार” माना जाता है। यह जलडमरूमध्य यमन को अफ्रीका के देशों जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है और लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इस
अगर बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे कैप ऑफ गुड होप से लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। इससे यात्रा में करीब 10 से 15 दिन की देरी और भारी अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज और बाब अल-मंडेब दोनों रास्ते एक साथ बाधित हो जाते हैं, तो यह वैश्विक व्यापार के लिए बड़ी आपदा साबित हो सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन समुद्री मार्गों से दुनिया के करीब 30 प्रतिशत समुद्री तेल का परिवहन होता है। अकेले बाब अल-मंडेब से हर दिन लगभग 8.8 मिलियन बैरल तेल गुजरता है।
अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जो पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा एशिया से यूरोप जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अनाज की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।