चुनाव में कोई भी उल्लंघन भारी!पांच राज्यों में होने वाले हैं चुनाव, जानिए आचार संहिता के नियम, किन चीजों पर पाबंदी?

जैसे ही देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ, आचार संहिता (MCC) पूरी तरह लागू हो गई है। अब रैलियां, सोशल मीडिया, सरकारी संसाधनों का प्रचार में इस्तेमाल और जाति या धर्म के नाम पर वोट मांगना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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पांच राज्यों में होने वाले हैं चुनाव, जानिए आचार संहिता के नियम, किन चीजों पर पाबंदी?
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    देश में जैसे ही विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होता है, राजनीति की चाल भी बदल जाती है। इस बार भी यही हुआ। Election Commission of India ने पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की और उसी क्षण से पूरे चुनावी माहौल पर आचार संहिता लागू हो गई।

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    आचार संहिता यानी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) ऐसे नियमों का एक सेट है, जिनका पालन चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सरकार को करना होता है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाना है।

    क्या होती है आचार संहिता?

    जब भी चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान होता है, उसी समय से आचार संहिता लागू हो जाती है। यह नियमों और दिशा-निर्देशों का ऐसा ढांचा है जो चुनाव के दौरान राजनीतिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी राजनीतिक दल या नेता सरकारी संसाधनों का गलत इस्तेमाल न करे और सभी को बराबरी का मौका मिले।

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    यदि कोई पार्टी या उम्मीदवार इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी शिकायत चुनाव आयोग के पास की जा सकती है और आयोग जांच कर कार्रवाई कर सकता है।

    समाज में मतभेद फैलाने पर रोक

    आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव प्रचार के दौरान जाति, धर्म, भाषा या किसी समुदाय के आधार पर लोगों को भड़काना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। राजनीतिक दल अपने विरोधियों की आलोचना तो कर सकते हैं, लेकिन यह आलोचना केवल उनकी नीतियों, कार्यक्रमों या पिछले कामकाज तक सीमित होनी चाहिए।

    किसी नेता के निजी जीवन, परिवार या बिना सबूत के आरोप लगाना नियमों के खिलाफ माना जाता है। इसके अलावा धर्म या धार्मिक स्थलों के नाम पर वोट मांगना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है।

    सरकार और सत्तारूढ़ दल पर सख्त नियम

    आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार के कामकाज पर भी कई तरह की सीमाएं लग जाती हैं। नई सरकारी योजनाओं या परियोजनाओं की घोषणा नहीं की जा सकती। किसी भी नई परियोजना का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं हो सकता। सरकारी गाड़ी, विमान, बंगला या सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। मंत्री अपने सरकारी दौरे को चुनाव प्रचार के साथ नहीं जोड़ सकते। इसके अलावा सरकारी पैसे से विज्ञापन देकर सरकार की उपलब्धियां दिखाना भी प्रतिबंधित रहता है।

    अधिकारियों के तबादले पर रोक

    चुनाव के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए अधिकारियों के तबादलों पर भी रोक लग जाती है। यदि किसी अधिकारी का ट्रांसफर जरूरी हो, तो इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेना अनिवार्य होता है। मंत्री या नेता चुनाव अधिकारियों को बिना कारण नहीं बुला सकते।

    रैलियां, सभाएं और जुलूस के नियम

    चुनाव प्रचार के दौरान रैलियों और सभाओं के लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। किसी भी रैली या सभा के लिए पहले पुलिस से अनुमति लेना जरूरी होता है। सुबह 6 बजे से पहले और रात 10 बजे के बाद सार्वजनिक सभाएं नहीं की जा सकतीं। लाउडस्पीकर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बंद रखना अनिवार्य है। मतदान से 48 घंटे पहले सभी तरह का चुनाव प्रचार बंद करना पड़ता है।

    मतदान केंद्र के आसपास सख्ती

    मतदान के दिन नियम और ज्यादा सख्त हो जाते हैं। मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का प्रचार नहीं किया जा सकता। 200 मीटर के अंदर अस्थायी पार्टी ऑफिस या ज्यादा पोस्टर-बैनर लगाने की अनुमति नहीं होती। मतदान वाले दिन हथियार लेकर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। चुनाव प्रचार के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों के लिए भी अनुमति लेना जरूरी होता है।

    सोशल मीडिया और चुनाव घोषणा पत्र पर नजर

    आज के डिजिटल दौर में चुनाव प्रचार का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर भी होता है। इसलिए आचार संहिता के तहत फेक न्यूज, डीपफेक वीडियो या गलत जानकारी फैलाना अपराध माना जाता है।

    इसके अलावा बच्चों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में नहीं किया जा सकता। शराब की दुकानों की नीलामी जैसी प्रक्रियाएं भी चुनाव के दौरान टाल दी जाती हैं। चुनाव खत्म होने से पहले एग्जिट पोल दिखाने पर भी रोक रहती है।

    नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होती है?

    यदि कोई नेता, उम्मीदवार या राजनीतिक दल आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो चुनाव आयोग उसकी जांच कर सकता है। आयोग चेतावनी दे सकता है, चुनाव प्रचार पर रोक लगा सकता है या जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

    हालांकि आचार संहिता सीधे कानून नहीं है, लेकिन चुनाव आयोग के पास इसे लागू करवाने और सख्त कदम उठाने की शक्ति होती है। चुनाव की घोषणा के साथ ही ये नियम लागू हो जाते हैं और मतदान व परिणाम आने तक जारी रहते हैं। 

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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