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ढाका :बांग्लादेश में एक और हिंदू की निर्मम हत्या, खुले बाजार में गोलियों से भूना, 3 हफ्ते में 5वीं मौत

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इन घटनाओं को ‘आपराधिक कृत्य’ बताया है और जांच के आदेश दिए हैं। वहीं भारत ने आधिकारिक तौर पर इन हत्याओं की निंदा की है और बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
बांग्लादेश में एक और हिंदू की निर्मम हत्या, खुले बाजार में गोलियों से भूना, 3 हफ्ते में 5वीं मौत
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ढाका। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला जेस्सोर जिले के मोनिरामपुर इलाके से सामने आया है, जहां कट्टरपंथियों ने एक हिंदू युवक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना सोमवार, 5 जनवरी 2026 की दोपहर की बताई जा रही है।मृतक की पहचान राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने दिनदहाड़े युवक को निशाना बनाया और गोली मारकर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि हिंदू समुदाय में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

    अब तक कई हिंदुओं की निर्मम हत्याएं

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ ही हफ्ते पहले दीपू चंद्र दास समेत कई हिंदुओं की हिंसक हत्याओं ने बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि भारत तक में गहरी चिंता पैदा कर दी थी। इसके बावजूद अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की लगातार बढ़ती असुरक्षा और भय के माहौल को उजागर करता है।

    लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं से यह सवाल और गहरा हो गया है कि चुनावी माहौल के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासन कितना सक्षम है।

    बाजार घूमने आया राणा और फिर...

    यह वारदात सोमवार, 5 जनवरी को बांग्लादेश के जेसोर जिले के मोनिरामपुर उपजिला स्थित कपालिया बाजार में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शाम करीब 5:45 बजे अज्ञात हमलावरों ने अचानक राणा प्रताप बैरागी पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोलियां लगते ही राणा प्रताप बैरागी की मौके पर ही मौत हो गई।

    बताया जा रहा है कि राणा प्रताप बैरागी उस समय बाजार में अपने सामान्य काम से मौजूद थे, तभी हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के तुरंत बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। मृतक की पहचान 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है। वह केशवपुर उपजिला के अरुआ गांव के निवासी थे और तुषार कांती बैरागी के पुत्र बताए जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है।

    लगातार हत्याएं बनीं मानवाधिकार 'संकट'

    बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा अब केवल एक आंतरिक कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह धीरे-धीरे गंभीर मानवाधिकार संकट का रूप लेती जा रही है। राणा प्रताप बैरागी की हत्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हालात अब भी सामान्य नहीं हैं और अल्पसंख्यकों के बीच भय का माहौल लगातार गहराता जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इस तरह की घटनाओं के दोषियों को सख्त और त्वरित सजा नहीं दी जाती, तब तक हिंसा और डर का यह माहौल खत्म होना मुश्किल है। लगातार हो रही हत्याएं और हमले प्रशासन की भूमिका और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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