नई दिल्ली। भारत और सऊदी अरब के रिश्ते अब केवल तेल के लेन-देन तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह एक गहरी रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। इसी कड़ी में एक अहम कदम तब देखने को मिला जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल रविवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे। अजित डोभाल की यह सऊदी यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है, जब मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों के हालात तेजी से बदल रहे हैं और पूरी दुनिया की नजरें इस इलाके पर टिकी हैं।
डोभाल का किंग खालिद इंटरनेशल एयरपोर्ट पर पहुंचते ही भारत के राजदूत डॉ.सुहेल खान और सऊदी अरब के डॉ. सऊद अल-साती (डिप्टी मिनिस्टर फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स) ने स्वागत किया। इस मीटिंग में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और भू-राजनीतिक परिवर्तनों पर विस्तार से बात की गई। भारत की तरफ से अजित डोभाल ने क्षेत्रीय विकास और आपसी सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बैठक में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान भी मौजूद थे, जिससे स्पष्ट होता है कि ऊर्जा के मोर्चे पर भारत कुछ बड़ा प्लान कर रहा है।
अजित डोभाल की इस यात्रा को मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदुओं के इर्द-गिर्द देखा जा रहा है। पहला, द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाना। दूसरा, क्षेत्रीय सुरक्षा की वर्तमान स्थिति, खासकर लाल सागर और आसपास के इलाकों में पैदा हुए तनाव को लेकर और तीसरा, आपसी हितों (Mutual Interest) से जुड़े वे मुद्दे जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। भारत और सऊदी अरब के बीच 2019 में 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल' की स्थापना हुई थी। इसकी कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के हाथों में है। डोभाल की यह यात्रा इसी काउंसिल के उद्देश्यों को जमीन पर उतारने की एक कोशिश है। आज दोनों देश न केवल कच्चे तेल के व्यापार पर बात कर रहे हैं, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), ग्रीन हाइड्रोजन और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
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इस दौरे का एक सबसे अहम पहलू रक्षा सहयोग है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और सऊदी अरब के बीच नौसेना अभ्यास और सैन्य तालमेल काफी बढ़ा है। डोभाल ने अपनी बातचीत में इंटेलिजेंस शेयरिंग (खुफिया जानकारी साझा करना) और साइबर सुरक्षा को लेकर सऊदी अधिकारियों के साथ भविष्य की रूपरेखा तैयार की। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई (Counter-Terrorism) में दोनों देश अब एक सुर में बात कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोभाल का यह दौरा पाकिस्तान के लिए भी एक कड़ा संदेश है। जिस तरह से सऊदी अरब और भारत के रक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं, उससे इस क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ रहा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कैसे दोनों देश मिलकर पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। अजित डोभाल ने हाल के महीनों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से लेकर पश्चिम एशिया तक के कई महत्वपूर्ण देशों की यात्राएं की हैं। बैठक में सऊदी ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मूसाएद अल-ऐबन भी मौजूद रहे।
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आज जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष की स्थिति है, तब भारत और सऊदी अरब जैसे दो बड़े देशों का एक साथ आना अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए सुखद संकेत है। प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ हुई चर्चा में यह बात निकलकर आई कि पश्चिम एशिया में विकास के लिए सहयोग ही एकमात्र रास्ता है। डोभाल ने स्पष्ट किया कि भारत इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए हर संभव रणनीतिक मदद देने को तैयार है।