मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही हालात बिगड़ गए हैं। कुछ दिन पहले तक उम्मीद जताई जा रही थी कि, बातचीत के जरिए दोनों देश किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी तनाव कम हो सकता है, लेकिन जमीनी हालात ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
दरअसल, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सख्त रणनीति जारी रखते हुए समुद्री नाकाबंदी को और मजबूत किया है। वहीं ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे तेज असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर देखने को मिला है। रविवार को जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ट्रेडिंग शुरू हुई, कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया।
शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज पर अमेरिकी कच्चा तेल यानी WTI करीब 6.4% बढ़कर 87.88 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। वहीं इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 6.5% उछलकर 96.25 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
ताजा कीमतें-
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कमोडिटी |
कीमत (USD/बैरल) |
बदलाव |
% बदलाव |
पिछला बंद |
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WTI Crude Oil |
87.88 |
+5.29 |
+6.40% |
82.59 |
|
Brent Crude |
96.25 |
+5.87 |
+6.50% |
90.38 |
यह तेजी ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले ही तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई थी। उस समय बाजार को उम्मीद थी कि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा और सप्लाई सामान्य हो जाएगी। लेकिन जैसे ही हालात फिर बिगड़े, बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई और कीमतों में उछाल आ गया।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। खाड़ी देशों से एशिया और यूरोप तक तेल की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे तौर पर ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को प्रभावित करता है। इस समय ईरान की ओर से इस स्ट्रेट पर नियंत्रण बढ़ाने और जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड के सख्त रुख ने इस पूरे विवाद को और भड़का दिया है। उन्होंने कहा है कि, ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी रहेगी और किसी भी जहाज को इसे तोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके बाद ईरान ने भी अपना रुख बदलते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी बलों ने कई जहाजों पर फायरिंग की और अमेरिकी गतिविधियों का विरोध किया। इतना ही नहीं, एक ईरानी झंडे वाले कमर्शियल जहाज को अमेरिकी बलों द्वारा जब्त किए जाने की भी खबर सामने आई है।
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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब आठवें हफ्ते में पहुंच चुका है। यह स्थिति धीरे-धीरे एक बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप लेती जा रही है। इस संघर्ष का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं। एशिया और यूरोप के कई देश तेल सप्लाई में रुकावट और बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं।
पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों पर भी दिखने लगा है। उत्पादन लागत बढ़ने से कई सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे महंगाई का खतरा भी बढ़ गया है।
तेल बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। जंग शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो बढ़कर 119 डॉलर तक पहुंच गई थी। हालांकि, हाल के दिनों में यह कीमत 82 से 90 डॉलर के बीच स्थिर हो गई थी, लेकिन अब एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। यह स्थिति बाजार में अनिश्चितता को दर्शाती है।
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वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने ताजा रेट जारी किए हैं, जिनमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
प्रमुख शहरों के ताजा रेट-
पेट्रोल की कीमत (₹/लीटर)
|
शहर |
कीमत |
|
दिल्ली |
94.77 |
|
मुंबई |
103.50 |
|
कोलकाता |
105.45 |
|
चेन्नई |
100.90 |
|
लखनऊ |
94.85 |
|
अहमदाबाद |
94.68 |
|
इंदौर |
106.81 |
|
पटना |
103.82 |
डीजल की कीमत (₹/लीटर)
|
शहर |
कीमत |
|
दिल्ली |
87.67 |
|
मुंबई |
90.03 |
|
कोलकाता |
92.02 |
|
चेन्नई |
92.48 |
|
लखनऊ |
87.99 |
|
अहमदाबाद |
90.35 |
|
इंदौर |
92.18 |
|
पटना |
91.84 |
इन कीमतों से साफ है कि फिलहाल आम लोगों को राहत मिली हुई है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है तो आने वाले समय में इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।
भारत के मुकाबले पड़ोसी देशों में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। यह अंतर उनकी टैक्स पॉलिसी, सब्सिडी और सप्लाई सिस्टम पर निर्भर करता है।
|
देश |
पेट्रोल कीमत (₹/लीटर) |
|
बांग्लादेश |
90.95 |
|
पाकिस्तान |
122.42 |
|
चीन |
130.11 |
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श्रीलंका |
134.38 |
|
नेपाल |
136.86 |
|
म्यांमार |
146.82 |
इन आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक संकट का असर हर देश पर अलग-अलग तरीके से पड़ रहा है, जो उनकी आर्थिक स्थिति और नीतियों पर निर्भर करता है।