Agniveer Scheme:क्या बदलने वाली है अग्निवीर योजना? अब 25% नहीं, 50% या 75% जवान होंगे पक्के!

साल 2022 में शुरू हुई अग्निवीर योजना अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ती दिख रही है। अब तक इस योजना में चार साल की सेवा पूरी करने वाले सिर्फ 25% अग्निवीरों को ही सेना में स्थायी नौकरी (पर्मानेंट) मिलती थी। लेकिन अब थलसेना, नौसेना और वायुसेना इस सीमा को बढ़ाने की मांग कर रही हैं। तीनों सेनाओं का मानना है कि ज्यादा प्रशिक्षित जवानों को लंबे समय तक सेना में रखना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो लाखों युवाओं के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है।
क्या है अग्निवीर योजना?
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में हुई थी। इसका उद्देश्य सेना को युवा बनाना और रक्षा बजट का बेहतर इस्तेमाल करना था। इस योजना के तहत 17.5 से 21 साल के युवाओं की भर्ती थलसेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए की जाती है। इन जवानों को 'अग्निवीर' कहा जाता है। चार साल की सेवा पूरी होने के बाद दो स्थितियां होती हैं।
- केवल 25% अग्निवीरों को उनकी मेरिट, मेडिकल फिटनेस और सेना की जरूरत के आधार पर स्थायी नौकरी मिलती है। इसके बाद वे करीब 15 साल या उससे ज्यादा समय तक सेना में सेवा करते हैं।
- बाकी 75% अग्निवीर सेवा से बाहर हो जाते हैं। उन्हें करीब 11.71 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज दिया जाता है, जिसमें सरकार और अग्निवीर दोनों का योगदान होता है।
अब क्या बदलाव होने जा रहा है?
अब तीनों सेनाएं चाहती हैं कि केवल 25% जवानों को ही नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा अग्निवीरों को स्थायी किया जाए। थलसेना लगभग 50% अग्निवीरों को पर्मानेंट करना चाहती है। वायुसेना भी करीब 50% जवानों को रखने के पक्ष में है। नौसेना सबसे बड़ा बदलाव चाहती है। वह 75% अग्निवीरों को स्थायी करने का प्रस्ताव लेकर आई है। फिलहाल इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
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तीनों सेनाएं यह बदलाव क्यों चाहती हैं?
- चार साल में पूरी ट्रेनिंग नहीं हो पाती- सेना के कई काम बेहद तकनीकी होते हैं। खासकर नौसेना और वायुसेना में आधुनिक मशीनों और हथियारों को चलाने में लंबा समय लगता है। कई बार किसी जवान को पूरी तरह तैयार होने में तीन साल से भी ज्यादा समय लग जाता है।
- आधुनिक हथियार और नई तकनीक सीखने में समय लगता है- पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना ने कई नए हथियार, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और आधुनिक तकनीक अपनाई है। इन सभी को सही तरीके से चलाने के लिए लंबे समय तक अभ्यास जरूरी होता है।
- ऑपरेशन सिंदूर से मिला बड़ा अनुभव- हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अग्निवीरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन सेना ने यह भी महसूस किया कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। जो जवान कई वर्षों तक अलग-अलग इलाकों में काम कर चुके होते हैं, वे कठिन परिस्थितियों में ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से फैसले लेते हैं।
- सेना में जवानों की कमी- इस समय भारतीय सेना में करीब 1.8 लाख जवानों की कमी बताई जा रही है। हर साल बड़ी संख्या में सैनिक रिटायर भी होते हैं। अगर ज्यादा अग्निवीरों को स्थायी नौकरी मिलती है, तो इस कमी को जल्दी पूरा किया जा सकता है।
अगर सरकार ने मंजूरी नहीं दी तो क्या होगा?
अगर 25% की सीमा नहीं बढ़ाई गई, तब भी सेना के पास एक दूसरा विकल्प रहेगा। सेना विशेष यूनिट्स, जैसे भैरव बटालियन जैसी विशेषज्ञ इकाइयों में ज्यादा अनुभवी अग्निवीरों को रख सकती है। वहीं सामान्य यूनिट्स में नए अग्निवीरों की भर्ती जारी रहेगी। इससे नियम भी नहीं टूटेगा और जरूरत वाले क्षेत्रों में अनुभवी जवान भी उपलब्ध रहेंगे।
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अग्निवीरों और उनके परिवारों के लिए दो बड़े प्रस्ताव
सरकार केवल स्थायी भर्ती बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि अग्निवीरों के सामाजिक सुरक्षा लाभ बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।
- शहीद अग्निवीरों के परिवार को आजीवन आर्थिक सहायता- अगर कोई अग्निवीर ड्यूटी के दौरान शहीद होता है, तो उसके परिवार को जीवनभर आर्थिक मदद देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
- घायल या विकलांग अग्निवीरों को उम्रभर मुफ्त इलाज- अगर कोई अग्निवीर ड्यूटी के दौरान घायल होकर स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो उसे जीवनभर मुफ्त इलाज और मेडिकल सुविधा देने की योजना पर भी विचार चल रहा है।
अगर बदलाव लागू हुआ तो क्या फायदे होंगे?
- सेना और मजबूत होगी- ज्यादा अनुभवी जवान सेना में बने रहेंगे। इससे युद्ध और आपातकाल जैसी परिस्थितियों में सेना की क्षमता बढ़ेगी।
- युवाओं को नौकरी की ज्यादा सुरक्षा मिलेगी- अगर 50% या 75% अग्निवीरों को स्थायी नौकरी मिलने लगी, तो हजारों युवाओं को लंबा करियर मिलेगा और भविष्य की चिंता कम होगी।
- नई तकनीक का बेहतर इस्तेमाल होगा- लंबे समय तक सेवा करने वाले जवान आधुनिक हथियारों और तकनीक में अधिक दक्ष होंगे।
क्या कुछ नुकसान भी हो सकते हैं?
हर बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं। ज्यादा जवान स्थायी होंगे तो सरकार पर पेंशन और वेतन का खर्च बढ़ेगा। नई भर्ती के लिए पहले की तुलना में कम सीटें बच सकती हैं। हालांकि सेना अगले साल करीब 90 हजार नई भर्तियां करने की तैयारी भी कर रही है, जिससे युवाओं के अवसर पूरी तरह खत्म नहीं होंगे।











