ईरान का ‘Axis of Resistance’ संदेश:खामेनेई के जनाजे में दिखा शक्ति प्रदर्शन, HHH की मौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार ने केवल एक धार्मिक या राजकीय कार्यक्रम के बजाय पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा संदेश दे दिया। इस समारोह में ईरान समर्थित संगठनों हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की मौजूदगी ने एक बार फिर Axis of Resistance की सक्रियता को सामने ला दिया।
ट्रिपल H की मौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र
तेहरान में आयोजित इस समारोह में Hamas, Houthis, Hezbollah प्रतिनिधियों की मौजूदगी सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही। इन्हें मिलाकर ट्रिपल H कहा जा रहा है। लंबे समय से इन संगठनों को लेकर यह दावा किया जा रहा था कि सैन्य अभियानों के बाद इनकी ताकत कमजोर हो गई है लेकिन इस कार्यक्रम में इनकी भागीदारी ने अलग तस्वीर पेश की।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल
रिपोर्ट्स के अनुसार हिज्बुल्लाह की ओर से वरिष्ठ नेता मोहम्मद फनीश के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ जिसमें कई परिवार सदस्य भी थे। वहीं हमास के राजनीतिक प्रमुख मोहम्मद दरविश के नेतृत्व में प्रतिनिधि पहुंचे जिनमें बासेम नईम भी शामिल थे। इसके अलावा फिलिस्तीनी संगठन इस्लामिक जिहाद के नेता जियाद अल-नखाला और हूती समूह के वरिष्ठ सदस्य जैफ अल्लाह अल-शामी भी समारोह में मौजूद रहे।
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ईरान का ‘Axis of Resistance’ संदेश
ईरान ने अपने इजरायल-विरोधी सहयोगी नेटवर्क को Axis of Resistance नाम दिया है जिसमें Hamas, Houthis, Hezbollah और Iraq के कई सशस्त्र गुट शामिल हैं। इस समारोह के जरिए ईरान ने यह संकेत देने की कोशिश की कि क्षेत्रीय संघर्षों और सैन्य दबाव के बावजूद यह नेटवर्क अभी भी सक्रिय है।
इजरायल को मिला स्पष्ट संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल अंतिम संस्कार नहीं बल्कि एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन था। हमास की मौजूदगी ने गाजा संघर्ष के बावजूद उसके राजनीतिक ढांचे की सक्रियता का संकेत दिया। वहीं हिज्बुल्लाह की भागीदारी ने लेबनान मोर्चे की स्थिति को उजागर किया और हूती प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने लाल सागर क्षेत्र में प्रभाव की याद दिलाई।
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क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर
हाल के वर्षों में इजरायल और अमेरिका ने इन संगठनों को कमजोर करने के लिए कई सैन्य कार्रवाई की थी लेकिन इस समारोह ने यह संदेश दिया कि ईरान का सहयोगी नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यह मंच पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन और तनाव को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।












