महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS BPO से जुड़े कथित धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में अब नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी निदा खान ने कोर्ट में अपनी गर्भावस्था का हवाला देकर अग्रिम जमानत की मांग की है जिस पर NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बीच मामले को लेकर TCS ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कई अहम बातें स्पष्ट की हैं।
निदा खान के वकील ने कोर्ट में कहा है कि वह फरार नहीं है और मुंबई में अपने परिवार के साथ रह रही है। वकील के मुताबिक वह गर्भवती है और जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार है। इसी आधार पर अग्रिम जमानत की मांग की गई है।
प्रियंक कानूनगो ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर आरोपों में सिर्फ गर्भावस्था को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जेलों में भी मेडिकल सुविधाएं और बच्चों के लिए देखभाल की व्यवस्था होती है इसलिए कानून के पालन में ढील नहीं दी जानी चाहिए।
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मामले पर सफाई देते हुए TCS ने कहा है कि मीडिया में जिनका नाम HR मैनेजर के रूप में लिया जा रहा है वह सही नहीं है।

कंपनी के अनुसार निदा खान न तो HR मैनेजर थीं और न ही भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी थीं। वह एक प्रोसेस एसोसिएट के तौर पर काम कर रही थीं और किसी भी नेतृत्व पद पर नहीं थी।
TCS ने बताया कि मामले की आंतरिक जांच के लिए एक्सपर्ट टीम्स को शामिल किया गया है। इसमें डेलॉइट और ट्रिलीगल जैसी संस्थाओं को स्वतंत्र काउंसल के रूप में जोड़ा गया है। इसके अलावा एक ओवरसाइट कमेटी भी बनाई गई है जिसकी अध्यक्षता कंपनी के स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट इसी कमेटी को सौंपी जाएगी।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि नासिक यूनिट पूरी तरह से चालू है और सामान्य तरीके से काम कर रही है। मीडिया में यूनिट बंद होने की खबरों को TCS ने पूरी तरह गलत बताया है।
TCS के मुताबिक शुरुआती जांच में नासिक यूनिट से जुड़े सिस्टम और रिकॉर्ड में ऐसे आरोपों से संबंधित कोई शिकायत नहीं मिली है न ही कंपनी के एथिक्स या POSH चैनल पर इस तरह की शिकायत दर्ज हुई है। हालांकि कंपनी ने कहा कि विस्तृत जांच अभी जारी है।
दूसरी ओर महाराष्ट्र पुलिस की SIT टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर दबाव बनाने और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
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TCS ने अपने बयान में कहा कि कंपनी कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी भी तरह के दबाव या गलत व्यवहार के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है ताकि मामले की पारदर्शी जांच हो सके।