सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी छात्र आधार से वंचित न रहे। स्कूलों में लगाए जाने वाले शिविरों से न सिर्फ प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। पिछले चरणों में लाखों छात्र लाभान्वित हो चुके हैं, और अब पूरा फोकस 100 प्रतिशत कवरेज पर है।
‘विद्यार्थियों के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार’ अभियान का अगला चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा। इससे पहले अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच दो चरणों में करीब 15 लाख विद्यार्थियों के आधार कार्ड बनाए और अपडेट किए जा चुके हैं। इस बार अभियान को और व्यापक बनाते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य रखा गया है।
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जिन स्कूलों में बिना आधार वाले छात्रों की संख्या ज्यादा है, वहां विशेष शिविर लगाए जाएंगे। साथ ही आसपास के छोटे स्कूलों के बच्चों को भी इन्हीं शिविरों में शामिल किया जाएगा। छात्रों की संख्या के आधार पर क्लस्टर बनाकर शिविरों का आयोजन किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को फायदा मिल सके।
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अभियान को सफल बनाने के लिए करीब 500 से अधिक ऑपरेटर्स का चयन किया गया है। स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यूडीआईएसई-प्लस पोर्टल से उन छात्रों की सूची अपडेट करें जिनके आधार में जानकारी लंबित है। साथ ही छात्रों और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए रोस्टर भी तैयार किया जाएगा।
आधार कार्ड स्कूल एडमिशन, स्कॉलरशिप, प्रवेश परीक्षा और डीबीटी जैसी योजनाओं के लिए जरूरी है। बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट भी अहम है—पहला अपडेट 5 साल की उम्र में और दूसरा 15 साल में अनिवार्य होता है। 15 से 17 साल तक यह अपडेट मुफ्त है, जबकि उसके बाद शुल्क देना पड़ता है।