लोकसभा में सीटें बढ़ाने की तैयारी:2029 तक होंगी 850 सीटें, जानिए पूरी डिटेल

केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन के तहत मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने की योजना बनाई गई है,जिससे न केवल परिसीमन की प्रक्रिया को गति मिलेगी बल्कि लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता भी साफ हो सकता है।
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2029 तक होंगी 850 सीटें, जानिए पूरी डिटेल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव से जुड़े ड्राफ्ट बिल को सांसदों के साथ साझा कर दिया है और जल्द ही संसद के विशेष सत्र में इस पर चर्चा की योजना है। प्रस्ताव के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सीटों का पुनर्वितरण किया जाएगा। हालांकि विपक्ष ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने पर सवाल उठाते हुए इस मुद्दे पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

    लोकसभा सीटें बढ़ाने का क्या है पूरा प्लान ?

    केंद्र सरकार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव लेकर आई है। इसके तहत 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाएंगी, जिससे प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ेगा और जनसंख्या के अनुपात में सीटों का पुनर्निर्धारण किया जा सकेगा। इस बदलाव के जरिए देश की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक ढांचे को और व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे संसद में प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और प्रभावी होगा,साथ ही विभिन्न क्षेत्रों की आवाज को बेहतर तरीके से सामने लाया जा सकेगा।

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    महिला आरक्षण से कैसे जुड़ा है यह प्रस्ताव ?

    इस प्रस्ताव का सीधा संबंध महिला आरक्षण कानून और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए सीटों का पुनर्गठन जरूरी माना जा रहा है। इसी के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करने की योजना है। सरकार का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ने से महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने में आसानी होगी और आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।

    विशेष सत्र में होगा अहम फैसला

    सरकार इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है, जो तीन दिनों तक चल सकता है। इस दौरान जरूरी संवैधानिक संशोधनों पर विचार किया जाएगा और बिल को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। माना जा रहा है कि अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे चुनावी ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।

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    रणनीति बनाने में जुटा विपक्ष

    विपक्ष ने इस प्रस्ताव को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं और परिसीमन के आधार को लेकर असहमति जताई है। आम आदमी पार्टी, आरजेडी और डीएमके जैसे दलों का कहना है कि परिसीमन 2011 नहीं बल्कि 2021 की जनगणना के आधार पर होना चाहिए। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्षी दलों की एक बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर बुलाई गई है, जिसमें कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। विपक्ष का मानना है कि सरकार का यह कदम राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इस पर व्यापक चर्चा जरूरी है।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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