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IPO का क्रेज पड़ा ठंडा!66% शेयर इश्यू प्राइस से नीचे फिसले

शेयर बाजार में जारी गिरावट का असर अब IPO बाजार पर भी साफ नजर आने लगा है। एक समय निवेशकों के लिए तेज मुनाफे का जरिया माने जाने वाले IPO अब उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
66% शेयर इश्यू प्राइस से नीचे फिसले
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    शेयर बाजार में जारी गिरावट का असर अब IPO बाजार पर भी साफ नजर आने लगा है। एक समय निवेशकों के लिए तेज मुनाफे का जरिया माने जाने वाले IPO अब उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। मौजूदा हालात यह हैं कि हर तीन में से करीब दो कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

    आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

    पिछले एक साल में लिस्ट हुई कंपनियों में से लगभग 66 फीसदी के शेयर अपने IPO प्राइस से नीचे आ चुके हैं। यानी ज्यादातर निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं करीब 15 कंपनियों के शेयरों में 50% तक की गिरावट देखी गई है जबकि कुछ मामलों में निवेशकों का 70% तक पैसा घट गया है।

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    बाजार की गिरावट का सीधा असर

    पिछले 12 से 18 महीनों में शेयर बाजार खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में दबाव में रहा है। चूंकि ज्यादातर IPO इसी कैटेगरी से आते हैं इसलिए गिरावट का असर सीधे IPO शेयरों पर पड़ा है। इस वजह से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

    निवेशकों का बदला नजरिया

    जहां पहले निवेशक IPO को शॉर्ट टर्म कमाई का आसान तरीका मानते थे अब वे ज्यादा सतर्क हो गए हैं। ग्लोबल तनाव, बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और कमजोर होता रुपया भी निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।

    ओवरवैल्यूएशन बनी बड़ी वजह

    IPO में घटती दिलचस्पी की एक अहम वजह कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन भी है। तेजी के दौर में इन बातों को नजरअंदाज किया जाता था लेकिन अब गिरते बाजार में निवेशक हर पहलू को ध्यान से देख रहे हैं। 

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    कमजोर लिस्टिंग का ट्रेंड

    हाल के IPO को भी बाजार से ठंडा रिस्पॉन्स मिला है। कई कंपनियों के शेयर ग्रे मार्केट में या तो निगेटिव प्रीमियम पर हैं या बहुत कम प्रीमियम दिखा रहे हैं जो कमजोर लिस्टिंग का संकेत माना जा रहा है।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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