भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में युवा मोर्चा (भाजयुमो) की नई टीम को लेकर अंदरूनी खींचतान साफ नजर आ रही है। प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर की नियुक्ति को करीब 4 महीने हो चुके हैं लेकिन अब तक उनकी टीम का ऐलान नहीं हो पाया है। पार्टी के बड़े नेताओं के बीच नामों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही, जिससे प्रक्रिया लगातार टलती जा रही है।
भाजयुमो की टीम को लेकर इस बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की दिलचस्पी काफी ज्यादा है। हर नेता अपने समर्थकों को टीम में जगह दिलाने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि नामों पर सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है और कई दौर की बैठकों के बाद भी सूची फाइनल नहीं हो सकी है।
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युवा मोर्चा की टीम बनाते समय पार्टी के सामने क्षेत्रीय संतुलन साधने की भी बड़ी चुनौती है। अलग-अलग जिलों और वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के दबाव में चयन प्रक्रिया और जटिल हो गई है। पार्टी मुख्यालय के नेता इस संतुलन को साधने के लिए लगातार मशक्कत कर रहे हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से किसान, ओबीसी, एससी-एसटी और महिला मोर्चा की कार्यसमितियों का ऐलान पहले ही किया जा चुका है। अब सभी की नजरें युवा मोर्चा की टीम पर टिकी हैं। हालांकि अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का नाम भी अभी घोषित होना बाकी है।
हाल ही में घोषित ओबीसी मोर्चा की टीम को लेकर विवाद भी सामने आया है। 37 पदाधिकारियों की सूची में एक भी महिला को जगह नहीं मिलने पर सवाल उठे हैं। इसके बाद पार्टी अब युवा मोर्चा की टीम को लेकर ज्यादा सतर्क हो गई है, ताकि संतुलन और प्रतिनिधित्व दोनों बनाए रखा जा सके।
भाजयुमो को पार्टी का सबसे अहम संगठनात्मक विंग माना जाता है, क्योंकि यही भविष्य की राजनीतिक लीडरशिप तैयार करता है। ऐसे में इस टीम को लेकर सबसे ज्यादा दबाव भी बना हुआ है। यही वजह है कि पार्टी बिना पूरी सहमति के सूची जारी करने से बच रही है।