केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय की है। इसी दिशा में चल रहे अभियानों के कारण कई नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे और भी सरेंडर देखने को मिल सकते हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले कुल 11 नक्सलियों में 7 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक ये सभी लंबे समय से वंशधारा-नागावली डिवीजन में सक्रिय थे। संगठन में इनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां थीं।
सरेंडर करने वालों में नकुल चंद्रा, जो डीवीसीएम रैंक का नक्सली बताया जा रहा है, उसके अलावा एसीएम रैंक के कई अन्य नक्सली भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान इन नक्सलियों ने AK-47, SLR, INSAS राइफल समेत 12 बोर और सिंगल शॉट जैसे हथियार पुलिस के सामने जमा किए। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने संगठन की विचारधारा से मोहभंग होने और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हथियार छोड़ने का निर्णय लिया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार चल रहे ऑपरेशन और जागरूकता अभियान के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहे हैं।