वर्क फ्रॉम होम (WFH) को लेकर दुनियाभर में बहस जारी है, लेकिन अमेरिका से सामने आया एक मामला इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील बना देता है। ओहियो में एक गर्भवती महिला को घर से काम करने की अनुमति नहीं देना कंपनी को इतना महंगा पड़ा कि कोर्ट ने उस पर करीब 210 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोक दिया। यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी और कंपनी के बीच विवाद नहीं है, बल्कि यह कॉर्पोरेट नीतियों, मानव संवेदनाओं और कर्मचारियों के अधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। महिला की हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के बावजूद कंपनी ने उसे ऑफिस आने के लिए मजबूर किया, जिसके बाद जो हुआ उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
मामला ओहियो की रहने वाली चेल्सी वॉल्श से जुड़ा है, जो उस समय गर्भवती थीं और उनकी प्रेग्नेंसी को डॉक्टरों ने हाई-रिस्क बताया था। डॉक्टरों ने उन्हें साफ निर्देश दिए थे कि वह ज्यादा शारीरिक गतिविधि से बचें, बेड रेस्ट लें और घर से ही काम करें। इसी सलाह के आधार पर उन्होंने अपनी कंपनी से वर्क फ्रॉम होम की मांग की। लेकिन कंपनी ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया और कोई लचीलापन दिखाने से इनकार कर दिया।
जब चेल्सी वॉल्श ने वर्क फ्रॉम होम की मांग की, तो कंपनी ने उन्हें दो ही विकल्प दिए-
1. ऑफिस आकर काम करें
2. या फिर बिना वेतन के छुट्टी ले लें
इसका मतलब साफ था कि अगर वह छुट्टी लेतीं, तो उनकी आय के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी खत्म हो जाता। ऐसे में मजबूरी में उन्होंने ऑफिस जाकर काम करने का फैसला किया, जो उनके स्वास्थ्य और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए जोखिम भरा था।
महिला ने 22 फरवरी से ऑफिस जाना शुरू किया और लगातार तीन दिनों तक काम किया। यह सब उन्होंने डॉक्टर की सलाह के खिलाफ किया, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। 24 फरवरी को उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन यह जन्म समय से करीब 18 हफ्ते पहले हुआ था। समय से पहले जन्म होने के कारण नवजात की हालत बेहद नाजुक थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची जन्म के समय सांस ले रही थी और उसका दिल भी धड़क रहा था। लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। कुछ ही घंटों के भीतर नवजात की मौत हो गई। यह घटना परिवार के लिए गहरे सदमे से कम नहीं थी। महिला ने बाद में आरोप लगाया कि अगर उन्हें घर से काम करने की अनुमति मिल जाती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
ये भी पढ़ें: Viral Video : बैडमिंटन खेलते-खेलते अचानक गिरा शख्स, CCTV में कैद हुआ दिल दहला देने वाला मंजर
इस दर्दनाक घटना के बाद चेल्सी वॉल्श ने कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कराया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कंपनी ने एक उचित और आवश्यक मांग को नजरअंदाज किया। महिला की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम देना जरूरी था, लेकिन कंपनी ने इसे ठुकरा दिया। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना और कंपनी को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया।
अदालत ने अपने फैसले में कंपनी पर करीब 210.8 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया। यह जुर्माना केवल मुआवजा नहीं, बल्कि एक सख्त संदेश भी है कि कंपनियां कर्मचारियों की सेहत और परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। यह फैसला कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग इसे कर्मचारियों के अधिकारों की जीत बता रहे हैं, तो कुछ इसे कंपनियों के लिए सबक मान रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम को लेकर चल रही बहस में यह मामला एक अहम उदाहरण बन गया है।