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Women’s world Cup 2025 : मप्र की ‘क्रांति’,  टीम इंडिया की जीत में छतरपुर की बेटी ने इस तरह किया कमाल

भारतीय क्रिकेटर क्रांति गौड़ के गृह जिले में विश्व कप का फाइनल मुकाबला बड़ी स्क्रीन पर देखा गया
Women’s world Cup 2025 : मप्र की ‘क्रांति’,  टीम इंडिया की जीत में छतरपुर की बेटी ने इस तरह किया कमाल
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 में भारतीय टीम की जीत ने मप्र की लड़कियों के लिए भी नई रोशनी दी है। टीम इंडिया की इस जीत में मप्र के छतरपुर की रहने वाली क्रांति गौड़ भी शामिल रही हैं। क्रांति ने एक गेंदबाज के रूप में अपनी टीम को योगदान दिया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने 8 मैचों में 9 विकेट लिए। 

    महिला विश्व कप में भारतीय टीम की जीत पर पूरा देश जश्न मना रहा है। वहीं, मप्र के लिए भी यह खास क्षण है। इस जीत में मप्र की बेटी का शामिल होना हमें गर्व करने का अवसर दे रहा है। टीम इंडिया की जीत का जश्न मध्य प्रदेश के छतरपुर में भी खास अंदाज में मनाया गया। भारतीय क्रिकेटर क्रांति गौड़ के गृह जिले में विश्व कप का फाइनल मुकाबला बड़ी स्क्रीन पर देखा गया। भारत की जीत के साथ ही रहवासियों ने खूब आतिशबाजी की।

    वर्ल्ड कप में क्रांति का प्रदर्शन

    महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 में भारतीय टीम की गेंदबाज क्रांति गौड़ ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 8 मैचों में 9 विकेट हासिल किए। क्रांति ने सेमीफाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एलिसा हीली का बड़ा विकेट लिया। हीली इस समय वर्ल्ड क्रिकेट की सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में एक मानी जाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्ररक्षण में भी अपनी भूमिका निभाई।  इससे पहले मई 2025 में क्रांति गौड़ ने श्रीलंका के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में शानदार गेंदबाजी की। लेकिन उन्हें पहचान आईसीसी महिला विश्व कप 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में मिली, जहां उन्होंने तीन विकेट लेकर भारत की जीत में योगदान दिया। इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ भी उन्होंने 6 विकेट लिए थे।

    बेहद संघर्षपूर्ण रहा बचपन 

    छतरपुर जिले के छोटे से कस्बे घुवारा की रहने वाली 22 साल की क्रांति गौड़ का बचपन बेहद संघर्ष पूर्ण रहा है। क्रांति के पिता मुन्ना सिंह गौड़ कांस्टेबल थे। एक मामले में उनकी नौकरी जाने के बाद परिवार ने मजदूरी करके क्रांति का लालन-पालन किया। क्रांति को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था क्रांति के घर के सामने ही एक छोटा सा खेल मैदान है जिसमे क्रांति अपने दोस्तों के साथ टेनिस गेंद से खेलती थी। एक समय था जब क्रांति के पास खेलने के लिए जूते भी नहीं थे। तब वह नंगे पैर ही क्रिकेट खेलती थी। सीमित साधनों के बाद भी उनका जुनून कम नहीं हुआ। परिवार ने भी कठिन समय में उनका साथ नहीं छोड़ा एक दिन छतरपुर में हुए टूर्नामेंट में क्रांति को अचानक खेलने का मौका मिला। उस मैच में दोहरा प्रदर्शन करने के बाद स्थानीय कोच ने क्रांति की प्रतिभा को पहचाना और आगे खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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