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महिला आयोग में 5 साल से अध्यक्ष, न ही सदस्य, 24 हजार मामले पेंडिंग

इंस्टाग्राम से युवती का फोटो हटाने के मामले का निराकरण भी नहीं हो पाया
महिला आयोग में 5 साल से अध्यक्ष, न ही सदस्य, 24 हजार मामले पेंडिंग

अशोक गौतम/भोपाल। इंदौर की युवती सीमा सिंह परिवर्तित नाम की एक फोटो किसी शरारती ने इंस्टाग्राम पर अपलोड कर कुछ आपत्तिजनक बातें लिख दी। इसकी शिकायत युवती ने चार माह पहले थाने में की, मामले का निराकरण नहीं हुआ तो मप्र महिला आयोग में आवेदन दिया, लेकिन यहां न सुनवाई हुई और न ही इंस्टाग्राम से पोस्ट हटवाई गई। यही हाल आगर मालवा की बलात्कार से पीड़ित महिला के मामले का है। दरअसल साल 2019 से आयोग में न अध्यक्ष है और न ही सदस्य। पांच वर्ष से शिकायतों की फाइलें धूल खा रही हैं। इससे 24 हजार पीड़ित महिलाएं पांच वर्ष से न्याय की बाट जोह रही हैं। आयोग अपने स्तर से पुलिस और मैदानी अफसरों से शिकायत पर प्रतिवेदन तो बुला लेता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

ये है नियम: महिला आयोग के नियम और व्यवस्थाओं के अनुसार किसी भी शिकायत पर सुनवाई करना 15 दिन के अंदर जरूरी होता है।

सरकार बदलने पर भाजपा ने निरस्त की कांग्रेस की नियुक्ति

आयोग में पिछले पांच वर्ष से अध्यक्ष और सदस्यों की सरकार ने नियुक्ति नहीं की है। कांग्रेस सरकार ने 16 मार्च 2020 को अधिसूचना जारी कर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की थी। कुछ दिन बाद ही कांग्रेस सरकार गिर गई। इसके बाद भाजपा सरकार ने जिस अधिसूचना से अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कांग्रेस सरकार ने की थी, उसको ही निरस्त करने कर इन्हें हटा दिया था। मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया, फैसला नहीं हो पाया है।

हर साल करीब 3500 महिलाएं आयोग में करती हैं शिकायत

2020 में नियुक्ति होने से महिलाओं को यह उम्मीद जगी है कि नए अध्यक्ष और सदस्यों की सुनवाई कर महिलाओं की शिकायतों का तत्काल निराकरण होगा पर ऐसा नहीं हो पाया। बताया जाता है कि पति, परिवार, सहकर्मी, समाज सहित अन्य तमाम प्रताड़ना से पीड़ित प्रति वर्ष साढ़े तीन हजार से अधिक महिलाएं महिला आयोग का दरवाजा खटखटा कर न्याय गुहार लगाती हैं। 2023-24 में सबसे ज्यादा महिला प्रताड़ना के मामले सामने आए हैं।

पीड़िता बोलीं- नहीं होती सुनवाई

मैंने महिला महिला आयोग में पति से भरण पोषण के दिलाने के संबंध में कई महीने पहले शिकायत की थी। इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई और न ही मुझे न्याय मिला है। आयोग ने मेरी शिकायत के संबंध में सुनवाई भी नहीं की। -लक्ष्मी जाट, आवेदक महिला, जिला शाजापुर (परिवर्तित नाम )

ससुराल वाले दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित कर रहे हैं। इसकी शिकायत महिला आयोग में की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। -नजराना बानो, आवेदक, जिला भिंड (परिवर्तित नाम )

मंत्री बोलीं- नियुक्तियां होंगी

भाजपा सरकार महिलाओं के हित में पूरी तरह से समर्पित है। चुनाव आचार संहिता हटने के बाद महिला आयोग में अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। -निर्मला भूरिया, मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग

People's Reporter
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