आम खाने से पहले पानी में क्यों भिगोते हैं?दादी-नानी की सलाह के पीछे छिपा है साइंस, जानिए इसके फायदे

गर्मियों का मौसम और आम का स्वाद, यह ऐसा रिश्ता है जिसे भारत में शायद ही कोई नकार सके। दशहरी, लंगड़ा, केसर, हापुस और चौसा जैसे आमों का इंतजार लोग पूरे साल करते हैं। लेकिन आम खाने से पहले घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर एक सलाह जरूर देते हैं कि, आम को कुछ देर पानी में भिगोकर रखो। कई लोग इसे सिर्फ पुरानी परंपरा मानते हैं, लेकिन इसके पीछे आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों के अपने तर्क हैं।
आम को पानी में भिगोकर खाने से न सिर्फ यह ज्यादा सुरक्षित बनता है, बल्कि शरीर को इसके पोषक तत्वों का बेहतर लाभ भी मिल सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर आम को भिगोने की सलाह क्यों दी जाती है और इसे कितनी देर तक पानी में रखना चाहिए।
आम में मौजूद फाइटिक एसिड क्या होता है?
आम में प्राकृतिक रूप से फाइटिक एसिड पाया जाता है। इसे एंटी-न्यूट्रिएंट भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे जरूरी खनिजों के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब आम को कुछ समय तक पानी में भिगोया जाता है तो फाइटिक एसिड का स्तर कम होने लगता है। इससे शरीर आवश्यक मिनरल्स को बेहतर तरीके से ग्रहण कर पाता है और पोषण संबंधी लाभ बढ़ सकते हैं।
आम को भिगोने से कीटनाशकों से मिलती है राहत
आजकल फलों की खेती में कई तरह के कीटनाशकों और रसायनों का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा परिवहन और स्टोरेज के दौरान फल पर धूल-मिट्टी और अन्य अशुद्धियां भी जमा हो सकती हैं। आम को पानी में भिगोने से उसकी सतह पर मौजूद धूल, मिट्टी, केमिकल्स और कीटनाशकों के अवशेष काफी हद तक हट जाते हैं। इससे फल ज्यादा साफ और सुरक्षित हो जाता है, खासकर बच्चों और संवेदनशील लोगों के लिए।
क्या शरीर में गर्मी बढ़ाता है आम?
आयुर्वेद में आम को गर्म तासीर वाला फल माना गया है। माना जाता है कि, ज्यादा मात्रा में आम खाने से कुछ लोगों को शरीर में गर्मी, मुंहासे, पेट में जलन या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आम को पानी में भिगोने से उसका थर्मोजेनिक प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकता है। यही कारण है कि कई परिवारों में आज भी आम खाने से पहले उसे पानी में रखने की परंपरा निभाई जाती है।
पाचन तंत्र और आंतों के लिए कैसे फायदेमंद है?
आम फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। लेकिन कुछ लोगों को आम खाने के बाद पेट फूलना, गैस या भारीपन महसूस हो सकता है। पानी में भिगोने से कुछ ऐसे यौगिकों का प्रभाव कम हो सकता है जो पेट फूलने की समस्या बढ़ाते हैं। इससे आम पचाने में अपेक्षाकृत आसान हो सकता है और आंतों की सेहत को बेहतर समर्थन मिलता है।
एलर्जी और जलन का खतरा भी होता है कम
आम के डंठल से एक सफेद चिपचिपा पदार्थ निकलता है, जो कुछ लोगों की त्वचा या गले में जलन पैदा कर सकता है। संवेदनशील लोगों में इससे एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है। आम को पानी में भिगोने से यह पदार्थ काफी हद तक हट जाता है, जिससे फल का सेवन अधिक सुरक्षित माना जाता है।
क्या आम को भिगोने से स्वाद भी बेहतर होता है?
कई लोगों का अनुभव है कि, पानी में भिगोकर रखा गया आम ज्यादा ताजा, रसदार और ठंडक देने वाला महसूस होता है। पानी में रहने से फल की नमी बढ़ जाती है, जिससे उसका स्वाद और बनावट दोनों बेहतर लग सकते हैं। गर्मियों में ठंडे पानी में भिगोया गया आम खाने का अनुभव और भी सुखद माना जाता है।
आम को कितनी देर तक पानी में भिगोना चाहिए?
जानकारी के अनुसार, आम को कम से कम 1 से 2 घंटे तक पानी में भिगोना सबसे बेहतर माना जाता है। हालांकि अगर समय कम हो तो 20 से 30 मिनट तक पानी में रखने से भी कुछ लाभ मिल सकते हैं।
आम को भिगोने का सही तरीका-
- एक साफ बर्तन में पर्याप्त पानी भरें।
- आमों को पूरी तरह पानी में डुबो दें।
- कम से कम 30 मिनट से 2 घंटे तक भिगोकर रखें।
- खाने से पहले एक बार साफ पानी से धो लें।
क्या आम को भिगोना जरूरी है?
हालांकि आम को भिगोना कोई अनिवार्य नियम नहीं है, लेकिन पोषण विशेषज्ञ और आयुर्वेद दोनों इसे एक अच्छी आदत मानते हैं। इससे फल अधिक साफ, सुरक्षित और शरीर के लिए अनुकूल बन सकता है।











