नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया यह मामला किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। खुद को ज्योतिषी और नेवी कैप्टन बताने वाला अशोक खरात अब सलाखों के पीछे है। उस पर एक महिला से दुष्कर्म का आरोप है, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी और भी डरावनी होती चली गई। पुलिस को 58 संदिग्ध वीडियो मिले हैं, जिनमें कई महिलाओं के शोषण की आशंका जताई जा रही है। करोड़ों की संपत्ति, जबरन वसूली और हाई प्रोफाइल कनेक्शन। इस पूरे केस ने पुलिस महकमे को हिला दिया है। अब इस सनसनीखेज मामले की कमान आईपीएस तेजस्वी सातपुते के हाथों में है।
अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासे सामने आए, उन्होंने हर किसी को चौंका दिया। पुलिस जांच में 58 वीडियो बरामद हुए हैं, जिनमें कई महिलाओं से जुड़े गंभीर पहलू सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही जबरन वसूली का एंगल भी जुड़ गया है। बताया जा रहा है कि खरात के पास करीब 200 करोड़ रुपए की संपत्ति है, जिसमें उसका आलीशान फार्महाउस भी शामिल है। इस फार्महाउस पर कई नामचीन लोगों का आना-जाना था, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। इसी वजह से पुलिस ने इस केस के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है।

इस हाई प्रोफाइल केस की जांच की जिम्मेदारी 2012 बैच की IPS अधिकारी तेजस्वी सातपुते को सौंपी गई है। एक दशक से ज्यादा के अनुभव वाली सातपुते अपनी सख्त और स्मार्ट पुलिसिंग के लिए जानी जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनका सपना पायलट बनने का था, लेकिन नजर कमजोर होने के कारण वह इस क्षेत्र में नहीं जा सकीं। इसके बाद उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी और फिर एलएलबी की पढ़ाई की। एलएलबी के दौरान ही उन्हें UPSC के बारे में पता चला और उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया।
तेजस्वी सातपुते का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी, लेकिन असफल रहीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी रणनीति में बदलाव किया। इतिहास और मराठी को ऑप्शनल विषय के रूप में चुनते हुए उन्होंने अपनी रुचि के अनुसार पढ़ाई की। उनका मानना है कि किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए वही विषय चुनना चाहिए जिसमें आपकी पकड़ मजबूत हो। इसी सोच और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने यूपीएससी क्रैक किया और महाराष्ट्र कैडर में अपनी पहचान बनाई।
तेजस्वी सातपुते ने अपने काम से कई बार यह साबित किया है कि बदलाव लाने के लिए अलग सोच जरूरी होती है। पुणे में डीसीपी ट्रैफिक रहते हुए उन्होंने हेलमेट पहनने को लेकर अनोखा प्रयोग किया। उस समय सिर्फ 20% लोग ही हेलमेट पहनते थे। उन्होंने सीधे जनता पर नियम थोपने के बजाय पहले पुलिस विभाग से इसकी शुरुआत की। पुलिसकर्मियों के लिए हेलमेट अनिवार्य किया गया और नियम तोड़ने पर सख्ती दिखाई गई। इसके साथ ही उन्होंने एक छोटा सा प्रयोग कर लोगों को समझाया कि बिना हेलमेट समय तो बच सकता है, लेकिन जान का जोखिम बढ़ जाता है। इस पहल का असर यह हुआ कि हेलमेट पहनने वालों की संख्या 80% तक पहुंच गई।
सोलापुर में SP रहते हुए तेजस्वी सातपुते ने ‘ऑपरेशन परिवर्तन’ चलाकर अवैध शराब के कारोबार पर बड़ा प्रहार किया था। इस अभियान में उन्होंने सख्ती के साथ-साथ ‘सॉफ्ट पुलिसिंग’ यानी समझाइश और काउंसलिंग का भी सहारा लिया। यही संतुलित रणनीति उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। अब नासिक के इस सनसनीखेज केस में भी उनसे ऐसी ही प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस हाई प्रोफाइल मामले के और भी चौंकाने वाले राज सामने आने की संभावना है।