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इंदौर :हाईकोर्ट में सरकार बोलीं- दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतें, अगली सुनवाई 6 जनवरी को

इस बीच, इस गंभीर मामले को लेकर आज हाईकोर्ट में भी सुनवाई होने की संभावना है। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ मामले की ऑनलाइन सुनवाई करेगी।
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हाईकोर्ट में सरकार बोलीं- दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतें, अगली सुनवाई 6 जनवरी को
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 15 हो गया है। गुरुवार को एक 68 वर्षीय महिला गीताबाई की मौत के बाद यह संख्या और बढ़ी। वहीं इस मामले में राज्य सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है। इस प्रकरण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 6 जनवरी को अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

    सरकार का दावा- बैक्टीरिया पानी से केवल 4 मौते

    हाईकोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में सरकार की ओर से दावा किया गया है कि गंदे पानी की वजह से अब तक केवल चार लोगों की मौत हुई है। वहीं दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के आधार पर 15 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आ चुकी है।

    इस घटना में 16 बच्चों समेत कुल 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनका इलाज जारी है। महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने साफ तौर पर पुष्टि कर दी है कि सभी 15 लोगों की मौत दूषित पानी की वजह से ही हुई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

    CMHO- दूषित पानी से ही बीमारियां हुई

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी ने कहा कि किसैंपल की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर सामने आया है कि दूषित पानी पीने के कारण ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई।” उनका कहना है कि इलाके में पानी के सैंपल की जांच कराई गई थी, जिसमें खतरनाक बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई।

    कलेक्टर बोले- विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार

    वहीं, कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि अभी मामले की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।“मेडिकल कॉलेज में कल्चर टेस्ट भी किया जा रहा है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पर अंतिम रूप से कुछ कहना उचित होगा।” प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाके में पेयजल आपूर्ति बंद कर दी गई है, टैंकरों के जरिए साफ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और पाइपलाइन लीकेज व सीवेज कनेक्शन की जांच तेज कर दी गई है।

    NHRC ने मुख्य सचिव को भेजा नोटिस

    उधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में मौतों की संख्या, बीमार लोगों की स्थिति और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।

    MP हाईकोर्ट में आज हो सकती है सुनवाई

    इस बीच, इस गंभीर मामले को लेकर आज हाईकोर्ट में भी सुनवाई होने की संभावना है। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ मामले की ऑनलाइन सुनवाई करेगी। अदालत ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। हालांकि, हाईकोर्ट में शासन की ओर से अब तक जो जवाब पेश किया गया है, उसमें सिर्फ चार मौतों का ही उल्लेख किया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर मृतकों की संख्या कहीं अधिक बताई जा रही है। इसी विरोधाभास को लेकर भी आज की सुनवाई में सवाल उठ सकते हैं।

    विशेषज्ञ बोले- हर बैक्टेरिया के लिए स्पेशल जांच

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दूषित पानी का सीधा मतलब है कि उसमें खतरनाक बैक्टीरिया और विषैले तत्व मौजूद हैं। हालांकि, यह जानने के लिए कि किस विशेष बैक्टीरिया की वजह से लोग बीमार हुए और मौतें हुईं, स्पेशल कल्चर टेस्ट किया जाता है। इसी जांच के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि संक्रमण कितना गंभीर है और उसका स्रोत क्या है। 

    विशेषज्ञ ने आगे बताया कि ड्रेनेज के पानी में कई तरह के हानिकारक तत्व पाए जाते हैं। इसमें टॉयलेट से निकलने वाला मल-मूत्र, बाथरूम का नहाने का पानी, कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाला साबुन और पाउडर, साथ ही बर्तन धोने के डिटर्जेंट और फर्श साफ करने वाले केमिकल लिक्विड भी शामिल होते हैं। ये सभी घरेलू अपशिष्ट ड्रेनेज में मिलकर पानी को बेहद जहरीला बना देते हैं। 

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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