हाईकोर्ट की टिप्पणी :बहनों में बढ़ रही ईर्ष्या, ये विकराल रूप ले उससे पहले ही उसे नियंत्रित करना जरूरी

मप्र हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि बहनों के बीच ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृत्ति समाज में बढ़ रही है इसे नियंत्रित करना जरूरी है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को 3 माह में मानसिक स्वास्थ्य की नीति बनाने को कहा है।
बहनों में बढ़ रही ईर्ष्या, ये विकराल रूप ले उससे पहले ही उसे नियंत्रित करना जरूरी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। मप्र उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में कहा है कि बहनों (सिबलिंग्स) के बीच ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृत्ति समाज में बढ़ रही है। इससे पहले कि यह विकराल रूप ले, उसे नियंत्रित किया जाना जरूरी है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र बिसेन की डिवीजन बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव को कहा है कि वे 90 दिनों के भीतर स्कूल कॉलेज और जिला अस्पताल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नियुक्ति करने एक नीति बनाएं, ताकि युवाओं में बढ़ती ऐसी मानसिक विकृतियों पर अंकुश लगाया जा सके। बेंच ने मुख्य सचिव को 90 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने कहा है।

    दो साल पहले बहन की हत्या का आरोप

    डिवीजन बेंच ने ये आदेश नरसिंहपुर जिले के सांईखेड़ा में रहने वाली खुशबू उर्फ दिशा अवस्थी की अपील पर शुक्रवार को सुनवाई के बाद दिए। दरअसल, खुशबू पर आरोप है कि उसने ईर्ष्या के चलते अपनी बहन शिखा की हत्या 22 फरवरी 2023 को अपने सहयोगी राहुल सिंह के साथ मिलकर की है। इस पूरे मामले में हत्या की वजह ईर्ष्या ही बताई गई, लेकिन यह खुलकर सामने नहीं आया कि ईर्ष्या किस बात पर थी। 18 दिसंबर 2024 को एडिशनल सेशन जज की कोर्ट ने आरोपी खुश्बू और उसके सहयोगी राहुल सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देकर यह अपील दाखिल कर आरोपी खुश्बू ने जमानत का लाभ दिए जाने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की थी।

    खुशबू के घर से मिला था हत्या में इस्तेमाल चाकू

    शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता बीके उपाध्याय की दलील थी कि यह हत्या ईर्ष्या के कारण हुई थी। खुशबू के मेमोरेन्डम पर हत्या में इस्तेमाल की गई चाकू और पानी की टंकी के ढक्कन की बरामदगी उसके घर से हुई। वहीं सह-आरोपी राहुल सिंह की शर्ट पर शिखा के खून के भी निशान मिले थे।

    यह मानसिक विकृति का मामला

    आरोपी की ओर से दी गईं दलीलों को अमान्य करते हुए डिवीजन बेंच ने  साक्ष्यों के आधार पर खुशबू को जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया। अपने आदेश में कहा कि यह मामला नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य, खासतौर पर युवाओं के बीच होने वाली ईर्ष्या से उपजे मानसिक विकृति से जुड़ा है, जिस पर समय रहते नकेल कसना जरूरी है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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