मनोज चौरसिया, भोपाल। बीते कुछ महीने से शहर की गलियों में सुबह सुबह भक्ति की मधुर धुन सुनाई देने लगती है। हाथों में ढोल मंजीरे और मुंह पर देश भक्ति के तराने लिए लोग सुबह की पहली किरण के साथ प्रभातफेरी के लिए निकल पड़ते हैं। इस दौरान लोग भजन कीर्तन करते दो से तीन किमी की पैदल यात्रा करते हैं। यह प्रभात फेरी अब सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि सेहत को सुधारने का सामूहिक संकल्प भी बनता जा रहा है।
मालूम हो कि करीब चार माह पहले प्रदेशभर में आरएसएस, बजरंग दल आदि ने प्रभात फेरी की शुरुआत की थी। इस दौरान कॉलोनियों में समितियां बनाकर लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस समय भोपाल में कोलार, संजीव नगर, अवधपुरी, बैरागढ़, चौकसे सहित 1 दर्जन जगहों पर प्रभात फेरी निकाली जा रही हैं। सुबह की ताजी हवा में भजनों के साथ नियमित पैदल चलने से जहां स्वभाव में सकारात्मक बदलाव हो रहा है, वहीं सेहत में भी उल्लेखनीय सुधार हो रहे हैं। प्रभात फेरी में नियमित जाने से कई लोगों का वजन कम होने लगा तो ब्लड प्रेशर और शुगर भी कंट्रोल में है। लोगों का कहना है कि प्रभात फेरी उन्हें मानसिक ही नहीं शारीरिक रूप से मजबूत बना रही है।
अमरनाथ कॉलोनी के रहने वाले ज्ञानेन्द्र शर्मा का वजन बहुत ज्यादा बढ़ गया था, बीपी और शुगर भी था। चलने फिरने में हांफ भरने लगी थी। लेकिन जब से प्रभात फेरी से जुड़ा हूं, तब से मेरा वजन भी कंट्रोल हुआ है, पहले 115 किलो वजन था, जो अब घटकर करीबन 105 पर आ गया है। एनर्जी लेवल बढ़ा है। इसके साथ ही मानसिक रूप से मजबूती मिली है।
चौकसे नगर निवासी रत्नेश विश्वकर्मा बताते हैं कि मैं कई दिनों से कंधे की जकड़न से परेशान था, कमर दर्द भी रहता था। प्रभात फेरी के माध्यम से मुझे काफी आराम मिला है। कंधे की जकड़न भी कम हुई है। रोजाना 2 से 3 किमी पैदल चलने से स्टेमिना बढ़ी है। आंखों की समस्या ठीक हुई है। अब मैंने इसे रोज का रूटीन बना लिया है।
सर्वधर्म निवासी कमलेश चौरसिया बताते हैं कि शुगर के कारण इम्युनिटी कम हो गई थी। अब प्रभात फेरी से रूटीन बन गया है, सुबह पैदल चलने का फायदा हुआ है, शुगर भी कंट्रोल हुई है। बीपी भी कंट्रोल हो गया है।
गांधी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल शेजवार बताते हैं कि सुबह की प्रभात फेरी कई दृष्टि से फायदेमंद है। ताजी हवा में पैदल चलना हृदय और फेफड़ों के लिए बेहद लाभकारी होता है। नियमित 2-3 किमी की वॉक से कैलोरी बर्न होती है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है। सुबह की धूप से शरीर को विटामिन-डी मिलता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। साथ ही, भजन-कीर्तन से मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह सामूहिक गतिविधि सामाजिक जुड़ाव भी बढ़ाती है, जिससे अवसाद जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। सुबह के समय शारीरिक गतिविधि खासकर पैदल चलने से मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करती है और शरीर की अतिरिक्त वसा (फैट) को जलाने में मदद करती है।