टेक डेस्क। दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp इन दिनों एक बड़े विवाद में फंसता नजर आ रहा है। जिस प्लेटफॉर्म को करोड़ों लोग अपनी निजी बातचीत के लिए सबसे सुरक्षित मानते हैं, उसी पर अब डेटा प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। टेक दुनिया के बड़े नाम एलन मस्क और पावेल डुरोव ने WhatsApp की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ कंपनी की पैरेंट Meta Platforms इन आरोपों को पूरी तरह गलत बता रही है।
एलन मस्क ने अपने प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए साफ कहा कि WhatsApp पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यूजर्स से X चैट का इस्तेमाल करने की सलाह दी और दावा किया कि वहां बेहतर प्राइवेसी मिलती है।
वहीं पावेल डुरोव ने तो WhatsApp के एन्क्रिप्शन सिस्टम को इतिहास का सबसे बड़ा कंज्यूमर फ्रॉड तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि, कंपनी अरबों यूजर्स को गुमराह कर रही है और उनके मैसेज पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि, Telegram और X दोनों ही WhatsApp के प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म हैं।
इन गंभीर आरोपों पर Meta Platforms ने कड़ा जवाब दिया है। कंपनी के मुताबिक, WhatsApp पिछले कई सालों से Signal Protocol का इस्तेमाल कर रहा है, सभी मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं। कंपनी खुद भी यूजर्स के मैसेज नहीं पढ़ सकती, मॉडरेशन सिस्टम एन्क्रिप्शन को नहीं तोड़ता। Meta ने यह भी साफ किया कि, किसी भी चैट की जांच केवल तब होती है जब यूजर खुद उसे रिपोर्ट करता है।
WhatsApp को लेकर यह विवाद अमेरिका में दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे के बाद शुरू हुआ है। जनवरी 2026 में कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दो यूजर्स ब्रायन वाई. शीराजी और निदा सैमसन ने यह केस दर्ज कराया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि, WhatsApp अपने यूजर्स के मैसेज को इंटरसेप्ट करता है, यानी बीच में एक्सेस करता है।
इतना ही नहीं यह भी दावा किया गया कि, कंपनी इन मैसेज को थर्ड पार्टी कंपनियों, जैसे एक्सेंचर के साथ शेयर कर सकती है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से ज्यूरी ट्रायल की मांग की है और कंपनी से हर्जाने की भी अपील की है। इस केस ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है।
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WhatsApp हमेशा दावा करता रहा है कि उसके सभी मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं। इसका मतलब होता है कि मैसेज सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है। लेकिन इस विवाद में कहा गया है कि, कुछ परिस्थितियों में मैसेज थर्ड पार्टी द्वारा एक्सेस किए जा सकते हैं। मॉडरेशन प्रक्रिया में बाहरी कंपनियों की भूमिका हो सकती है। इससे यूजर डेटा की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, यह एक्सेस आमतौर पर तब होता है जब कोई यूजर खुद किसी चैट को रिपोर्ट करता है।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, WhatsApp की मॉडरेशन प्रक्रिया में कुछ थर्ड पार्टी कंपनियां शामिल हो सकती हैं। ये कंपनियां यूजर द्वारा रिपोर्ट किए गए कंटेंट को रिव्यू करती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर मैसेज देखा जाता है, बल्कि केवल रिपोर्टेड चैट्स की जांच होती है। यूजर की शिकायत के आधार पर कंटेंट एक्सेस किया जाता है। फिर भी, इस प्रक्रिया ने प्राइवेसी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
WhatsApp की सुरक्षा को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। पहले भी साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने कुछ चिंताएं जताई थीं। एक डेमो में दिखाया गया था कि, मैसेज ट्रांसमिशन के दौरान सुरक्षित रहते हैं। लेकिन रिसीवर के डिवाइस पर पहुंचने के बाद डिक्रिप्ट हो जाते हैं। अगर डिवाइस असुरक्षित है, तो डेटा एक्सेस किया जा सकता है। इससे यह साफ होता है कि, प्राइवेसी सिर्फ ऐप पर नहीं, बल्कि यूजर के डिवाइस की सुरक्षा पर भी निर्भर करती है।
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एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मैसेज एक गुप्त कोड में बदल जाता है। यह कोड सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है। बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि कंपनी भी, इसे नहीं देख सकती। इससे यूजर की प्राइवेसी सुरक्षित रहती है।
Elon Musk और Mark Zuckerberg के बीच टकराव कोई नया नहीं है। मस्क ने Twitter (अब X) खरीदने के बाद Meta को खुली चुनौती दी थी। इसके जवाब में Meta ने Threads लॉन्च किया। 2023 में दोनों के बीच केज फाइट की चर्चा भी हुई थी। 2025 में मस्क ने अपने AI चैटबॉट को Meta AI से बेहतर बताया। ऐसे में WhatsApp पर मस्क के बयान को इस प्रतिद्वंद्विता से भी जोड़कर देखा जा रहा है।