क्या है यूरेनियम डस्ट :क्यों इसे लेकर दुनिया में मचा है बवाल? जानिए कहां मिलता है और कैसे रखा जाता है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद कि ईरान अपना यूरेनियम डस्ट अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है, हालांकि इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया। जिससे एक बार फिर यह शब्द चर्चा में आ गया है। यूरेनियम डस्ट केवल एक तकनीकी पदार्थ नहीं, बल्कि परमाणु ऊर्जा और परमाणु हथियारों से जुड़ा बेहद संवेदनशील संसाधन माना जाता है। यही वजह है कि इस पर दुनिया की बड़ी शक्तियों की नजर रहती है।
आखिर क्या होता है यूरेनियम डस्ट?
यूरेनियम डस्ट आमतौर पर संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम के उस रूप को कहा जाता है, जिसमें यूरेनियम-235 की मात्रा बढ़ा दी जाती है। प्राकृतिक यूरेनियम में करीब 99 प्रतिशत यूरेनियम-238 और केवल 0.7 प्रतिशत यूरेनियम-235 होता है।
परमाणु ऊर्जा उत्पादन या अन्य उपयोगों के लिए यूरेनियम-235 की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया को संवर्धन कहा जाता है। जब यह स्तर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तो इसे बेहद संवेदनशील परमाणु सामग्री माना जाता है।
यह भी पढ़ें: बेंजामिन नेतन्याहू बोले... हम आजाद देश, ट्रंप के इशारों पर काम नहीं करते, लेबनान में सेना हटाने से मना किया
इतना महत्वपूर्ण क्यों है यूरेनियम?
- यूरेनियम दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में से एक है। इसकी ऊर्जा क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1 किलोग्राम यूरेनियम लगभग 88 टन कोयले के बराबर ऊर्जा पैदा कर सकता है।
- इसी कारण इसका उपयोग परमाणु बिजलीघरों में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। हालांकि, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है, इसलिए इसकी निगरानी बेहद सख्त होती है।
दुनिया में सबसे ज्यादा यूरेनियम कहां पाया जाता है?
यूरेनियम भंडार के मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया में पहले स्थान पर है। उसके पास लगभग 16.7 लाख टन यूरेनियम मौजूद है। इसके बाद कजाकिस्तान, कनाडा, नामीबिया, रूस, नाइजर, दक्षिण अफ्रीका और चीन का स्थान आता है। ये भंडार मुख्य रूप से यूरेनाइट जैसे खनिजों से निकाले जाते हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।
ईरान के पास कितना संवर्धित यूरेनियम है?
अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित 400 किलोग्राम से अधिक यूरेनियम मौजूद था। इसके अलावा लगभग 200 किलोग्राम ऐसा पदार्थ भी था, जिसे आगे संवर्धित कर हथियार-ग्रेड स्तर तक पहुंचाया जा सकता था। हालांकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए है।
यह भी पढ़ें: ट्रंप की आसमान में बढ़ेगी ताकत... दिखाई नए विमान एयरफोर्स- 1 की तस्वीर, कहा- उड़ता- फिरता व्हाइट हाउस
संवर्धित यूरेनियम को कैसे रखा जाता है?
- विशेष कंटेनरों में भंडारण: संवर्धित यूरेनियम को सामान्य धातु की तरह नहीं रखा जाता, बल्कि विशेष सुरक्षा मानकों वाले कंटेनरों में रखा जाता है।
- अलग-अलग रूपों में सुरक्षित रखा जाता है: इसे ऑक्साइड पाउडर, धातु या यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (यूएफ-6) गैस के रूप में संग्रहित किया जा सकता है।
- सीलबंद और सुरक्षित परिसरों में रखा जाता है: भंडारण स्थल पूरी तरह सुरक्षित और निगरानी वाले होते हैं, जहां अनधिकृत प्रवेश पर रोक रहती है।
- अंतरराष्ट्रीय निगरानी रहती है: इसकी निगरानी आमतौर पर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) जैसी संस्थाएं करती हैं।
- कड़े सुरक्षा नियम लागू होते हैं: रेडियोधर्मी होने के कारण इसके भंडारण, परिवहन और उपयोग के लिए सख्त सुरक्षा और विकिरण नियंत्रण मानकों का पालन किया जाता है।
क्या भारत के पास भी है स्वदेशी यूरेनियम नेटवर्क?
भारत अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए काफी हद तक घरेलू संसाधनों पर निर्भर है। झारखंड के जादूगोड़ा और तुरामडीह तथा आंध्र प्रदेश के तुम्मलपल्ली क्षेत्र की खदानों से यूरेनियम निकाला जाता है। इस खनिज का प्रसंस्करण देश के भीतर ही किया जाता है, जिससे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों और रणनीतिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। यूरेनियम आज केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि किसी भी देश की सामरिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का महत्वपूर्ण आधार भी माना जाता है।











