बेंजामिन नेतन्याहू बोले...हम आजाद देश, ट्रंप के इशारों पर काम नहीं करते, लेबनान में सेना हटाने से मना किया

यरूशलम। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका और इजरायल के रिश्तों को लेकर उठ रहे सवालों पर बड़ा बयान दिया है। यरुशलम में आयोजित JNS समिट को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और अमेरिका दोनों स्वतंत्र देश हैं और अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेते हैं।
उन्होंने कहा, अमेरिका में कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप वही करते हैं जो मैं उनसे कहता हूं, जबकि इजरायल में कुछ लोगों को लगता है कि मैं ट्रंप के निर्देशों पर काम करता हूं। दोनों ही बातें गलत हैं। हम एक स्वतंत्र और गौरवशाली देश हैं और अपने हितों के अनुसार निर्णय लेते हैं।
इजरायल की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता- नेतन्याहू
नेतन्याहू ने कहा कि उनकी सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने माना कि कई मुद्दों पर अमेरिका और इजरायल की सोच समान होती है, लेकिन हर बार ऐसा जरूरी नहीं होता।
उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता, नेतृत्व और अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी का सम्मान करते हैं। यही मजबूत साझेदारी की असली नींव है।
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ईरान के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा
JNS समिट में नेतन्याहू ने दावा किया कि अमेरिका के सहयोग से इजरायली सेना ने इतिहास के सबसे बड़े हवाई अभियानों में से एक को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में ईरान के परमाणु ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया।
नेतन्याहू के अनुसार, कार्रवाई सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रही, बल्कि ईरान समर्थित आतंकी नेटवर्क और उसके ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
इजरायल : लेबनान में सेना की तैनाती जारी रहेगी
इजरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना तब तक तैनात रहेगी, जब तक देश की सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत महसूस होगी। उन्होंने कहा कि इजरायल का विवाद लेबनान से नहीं, बल्कि ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला से है। अगर हिजबुल्लाह इजरायल की सुरक्षा को खतरा पहुंचाना बंद कर दे, तो लेबनान के साथ शांति की संभावनाएं बन सकती हैं।
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अमेरिका-ईरान वार्ता पर क्या बोले नेतन्याहू
स्विट्जरलैंड में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता का जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि बातचीत का परिणाम चाहे जो भी हो, इजरायल ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दोहराया कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर इजरायल किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
1. स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान बातचीत
दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच करीब 80 मिनट तक चर्चा हुई। कोशिश 60 दिन के युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की है।
2. जेडी वेंस ने जताई उम्मीद
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वार्ता में सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की उम्मीद जताई।
3. ट्रंप की ईरान को चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि ईरान को लेबनान में हिजबुल्लाह की गतिविधियां रोकनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर अमेरिका और कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
4. लेबनान में बढ़ता नुकसान
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 2 मार्च से अब तक 4,106 लोगों की मौत और 12,153 लोग घायल हुए हैं। इजरायली सेना ने भी संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई है।
5. ईरान का 6 अरब डॉलर पर दावा
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशेकियान ने कहा कि शुरुआती समझौते के तहत कतर में जमा ईरान के 6 अरब डॉलर वापस मिलने का रास्ता बन सकता है।
अमेरिका-ईरान वार्ता: पहले दिन क्या- क्या तय हुआ?
- बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई पहली बैठक को सभी पक्षों ने सकारात्मक बताया। बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है।
2. 60 दिन में अंतिम समझौते का लक्ष्य
दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है।
3. विशेषज्ञ स्तर की चर्चा शुरू होगी
अब परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और तकनीकी मुद्दों पर विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें बातचीत करेंगी।
4. निगरानी के लिए हाई लेवल कमेटी
वार्ता प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी, जो बातचीत की प्रगति पर नजर रखेगी।
ईरान का दावा- परमाणु मुद्दे पर अब तक चर्चा नहीं
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम ने दावा किया है कि अब तक अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। एजेंसी ने ईरानी वार्ता दल से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा कि फिलहाल चर्चा का केंद्र युद्धविराम और व्यापक राजनीतिक समझौता है।











