पल्लवी वाघेला, भोपाल। उपभोक्ता ने ट्रेन का टिकट खरीदा, लेकिन कंफर्म नहीं हो पाया। जब उपभोक्ता ने रिफंड का सोचा तो इसके पहले ही उसका वॉलेट चोरी होने के कारण टिकट भी खो गया। ऐसे में जब रेलवे ने टिकट का पैसा रिफंड करने से इंकार कर दिया तो उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में गुहार लगाई। मामले में आयोग ने रेलवे द्वारा सेवा में कमी बताते हुए उपभोक्ता को जुर्माने सहित पूरा पैसा वापस करने के आदेश दिए हैं।
करोंद निवासी उपभोक्ता सुमित सिंह ने अपने आवेदन में बताया कि उन्होंने जबलपुर सोमनाथ एक्सप्रेस का टिकट लिया था। यह वेटिंग टिकट खो गया था, जब सुमित ने रेलवे में आवेदन दिया तो रेलवे ने उन्हें पैसा लौटाने से मना कर दिया। रेलवे ने तर्क दिया कि टिकट मूल रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। सुमित ने कई बार संपर्क किया और जब बात नहीं बनी तो साल 2023 के अंत में उपभोक्ता आयोग में केस लगाया।
सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि केवल टिकट खो जाने के आधार पर रिफंड नहीं रोका जा सकता है। रेलवे को टिकट की राशि ब्याज सहित लौटाने तथा हर्जाना देने का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर यात्रियों के वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है। जिला आयोग ने कहा है कि अगर किसी यात्री का वेटिंग टिकट खो जाता है तो केवल इसी आधार पर रेलवे रिफंड देने से इंकार नहीं कर सकती है। आयोग ने साफ किया कि यात्री के पास यात्रा और टिकट बुकिंग का प्रमाण होने पर रेलवे को टिकट की राशि लौटाना होगी।
आयोग ने यह भी कहा कि रेलवे ने केवल टिकट खो जाने का हवाला देकर यात्री को रिफंड देने से मना कर दिया था, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना। मामले में आयोग ने दस हजार रुपए मानसिक क्षति के लिए और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए जुर्माने के रूप में देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा टिकट की राशि भी 9 फीसद ब्याज के साथ देने को कहा है। इस तरह आयोग ने कुल 16,524 रुपए की राशि दो माह में देने के आदेश रेलवे को दिए।