वृंदावन में ‘चश्मा चोर’ बंदरों का खौफ :राष्ट्रपति मुर्मू का चश्मा बचाने का अनोखा जुगाड़, प्रशासन ने लगाए लंगूर के कटआउट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 19 मार्च के वृंदावन दौरे से पहले प्रशासन के सामने ‘चश्मा चोर’ बंदरों की चुनौती खड़ी हो गई है। बंदरों से निपटने के लिए लंगूर कटआउट लगाए जा रहे हैं और वन विभाग की 30 सदस्यीय टीम तैनात की गई है। जानिए वृंदावन में बंदरों की समस्या और प्रशासन की अनोखी तैयारी।
Follow on Google News
राष्ट्रपति मुर्मू का चश्मा बचाने का अनोखा जुगाड़, प्रशासन ने लगाए लंगूर के कटआउट
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में बंदरों की शरारतें कोई नई बात नहीं हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु अक्सर बंदरों की हरकतों से परेशान हो जाते हैं। खासकर चश्मा पहनने वाले लोगों के लिए तो ये बंदर किसी मुसीबत से कम नहीं होते। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग और गंभीर है।

    दरअसल देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च से तीन दिन के दौरे पर मथुरा-वृंदावन आने वाली हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसी सुरक्षा खतरे की नहीं बल्कि ‘चश्मा चोर’ बंदरों की बन गई है। यही वजह है कि, प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए एक अनोखा सुरक्षा प्लान तैयार किया है, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों के बीच तेजी से हो रही है।

    राष्ट्रपति के दौरे से पहले प्रशासन की बढ़ी चिंता

    देश के राष्ट्रपति का दौरा हमेशा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा एजेंसियां हर छोटे-बड़े खतरे को ध्यान में रखकर तैयारियां करती हैं। वृंदावन के मामले में यह खतरा किसी आतंकी गतिविधि या अपराध से नहीं बल्कि बंदरों से जुड़ा हुआ है।

    दरअसल वृंदावन के मंदिरों और बाजारों में रहने वाले बंदर अपनी शरारती हरकतों के लिए काफी मशहूर हैं। ये बंदर खासतौर पर चश्मा पहनने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं और अचानक झपट्टा मारकर उनका चश्मा छीन लेते हैं। ऐसी घटनाएं इतनी आम हो चुकी हैं कि स्थानीय लोग इसे यहां की ‘रोजमर्रा की घटना’ मानते हैं।

    यह भी पढ़ें: UP : पूर्व सपा विधायक विजय के घर में ब्लास्ट, तीन मंजिला मकान डगमगाया, 6 लोग जख्मी, बाल बाल बची पत्नी

    ‘चश्मा चोर’ बंदरों की अनोखी चाल

    वृंदावन के बंदरों की सबसे खास बात यह है कि, वे सिर्फ चश्मा छीनते ही नहीं बल्कि उसे वापस करने के लिए एक तरह की ‘डील’ भी करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बंदर चश्मा छीनने के बाद किसी ऊंची जगह पर बैठ जाते हैं और तब तक चश्मा वापस नहीं करते जब तक उन्हें खाने-पीने की चीजें नहीं दी जातीं। अक्सर लोग बंदरों को फ्रूटी, बिस्कुट, फल या अन्य खाने की चीजें देकर अपना चश्मा वापस लेते हैं। इस वजह से यहां के बंदरों को लोग मजाक में चश्मा चोर गैंग भी कहते हैं। कई श्रद्धालु तो वृंदावन आने से पहले ही चश्मा संभालकर रखने या बैग में रखने की सलाह भी देते हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यक्रम

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च से तीन दिवसीय दौरे पर मथुरा और वृंदावन आ रही हैं। उनके कार्यक्रम में कई धार्मिक और सामाजिक संस्थानों का दौरा शामिल है। राष्ट्रपति के कार्यक्रम के तहत वे-

    • उड़िया बाबा आश्रम जाएंगी
    • रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल का दौरा करेंगी
    • 21 मार्च को गोवर्धन परिक्रमा भी करेंगी

    इन कार्यक्रमों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहेंगे। इसलिए प्रशासन चाहता है कि, दौरे के दौरान किसी भी तरह की असुविधा या हास्यास्पद स्थिति पैदा न हो।

    Featured News

    बंदरों से निपटने के लिए अनोखा तरीका

    पहले जब भी किसी बड़े कार्यक्रम या वीआईपी दौरे के दौरान बंदरों की समस्या सामने आती थी तो प्रशासन प्रशिक्षित लंगूरों की मदद लेता था। लंगूर बंदरों के प्राकृतिक दुश्मन माने जाते हैं और उनकी मौजूदगी से बंदर आसपास नहीं आते। लेकिन अब वन्यजीव संरक्षण कानूनों के कारण इस तरह से लंगूरों को तैनात करना संभव नहीं है। इसी वजह से इस बार प्रशासन ने एक नया और अनोखा तरीका अपनाया है। वृंदावन के कई इलाकों में लंगूरों के कटआउट लगाए जा रहे हैं। माना जाता है कि, बंदर लंगूरों से डरते हैं, इसलिए उनके जैसे दिखने वाले कटआउट देखकर वे उस इलाके से दूर रह सकते हैं।

    30 सदस्यीय टीम तैनात

    बंदरों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने विशेष टीम भी बनाई है। करीब 30 सदस्यीय टीम संवेदनशील इलाकों में तैनात की जाएगी। ये कर्मचारी कई तरह के उपकरणों के साथ निगरानी करेंगे, जैसे गुलेल, लाठी-डंडे और लेजर लाइट। इनका इस्तेमाल बंदरों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि उन्हें दूर भगाने के लिए किया जाएगा।

    Uploaded media

    संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ाई जाएगी निगरानी

    प्रशासन ने उन क्षेत्रों की पहचान भी कर ली है जहां बंदरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इन क्षेत्रों में अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाएगा ताकि बंदरों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। राष्ट्रपति के रूट और कार्यक्रम स्थलों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा स्थानीय दुकानदारों और श्रद्धालुओं को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला

    जैसे ही वृंदावन में लंगूर कटआउट लगाने की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर यह तेजी से वायरल हो गई। लोग इस अनोखे उपाय को लेकर मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि, अगर बंदरों को पता चल गया कि राष्ट्रपति आई हैं तो डिमांड और बड़ी हो जाएगी। वहीं कुछ लोगों ने मजाक में लिखा कि, अब बंदरों के खिलाफ भी सिक्योरिटी प्लान बनाना पड़ रहा है। हालांकि, प्रशासन इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रहा है।

    यह भी पढ़ें: असम : कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दिया, CM हिमंता बोले अभी उनसे संपर्क में नहीं है

    वृंदावन में क्यों बड़ी है बंदरों की समस्या

    वृंदावन एक प्रमुख धार्मिक नगरी है जहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। यहां मंदिरों और बाजारों के आसपास बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं। श्रद्धालु अक्सर उन्हें खाने-पीने की चीजें देते हैं, जिससे उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके कारण कई बार बंदरों का व्यवहार आक्रामक भी हो जाता है। चश्मा, मोबाइल, प्रसाद और खाने की चीजें छीनने की घटनाएं यहां आम हैं।

    प्रशासन की उम्मीद

    प्रशासन को उम्मीद है कि, लंगूर कटआउट, अतिरिक्त निगरानी और वन विभाग की टीम की मदद से राष्ट्रपति के दौरे के दौरान बंदरों की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान कोई अप्रिय या असहज स्थिति न बने। अगर यह प्रयोग सफल होता है तो भविष्य में भी ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान इस तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts