वृंदावन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि यदि देश में गो हत्या को रोकना है तो केवल कानून पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज में गोभक्ति की भावना विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब लोगों के मन में गाय के प्रति सम्मान और संरक्षण का भाव पैदा होगा, तब गो हत्या अपने आप समाप्त हो जाएगी। उनका मानना है कि परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होती है और जब समाज का दृष्टिकोण बदलता है तो राष्ट्र भी स्वतः सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
अपने संबोधन में उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल किसी एक समय का परिणाम नहीं था। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद मंदिर नहीं बना, बल्कि जब पूरे देश में इसके लिए व्यापक जनसमर्थन और मांग उठी, तब न्यायालय को भी लगातार सुनवाई कर निर्णय लेना पड़ा। 2019 के बाद अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हो सका। उन्होंने इसे सामाजिक एकजुटता और आस्था की शक्ति का उदाहरण बताया।
पानीघाट स्थित पहाड़ी बाबा गोशाला में आयोजित जगद्गुरु मलूकदास जयंती महोत्सव में उन्होंने कहा कि हम जगद्गुरु मलूकदास की 452वीं जयंती मना रहे हैं और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि संत केवल उपदेश देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने जीवन से मार्ग दिखाते हैं। संतों ने सदैव धर्म और सत्य की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। उनके अनुसार धर्म के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि वह अधर्म पर विजय प्राप्त कर समाज को नई दिशा देता है। ऋषि-मुनियों की परंपरा में सत्य आज भी जीवित है और संत वेदों के वास्तविक अर्थ को समझकर उसे व्यवहार में उतारते हैं।
कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मलूकपीठ पहुंचे, जहां उन्होंने जगद्गुरु मलूकदास के समाधि स्थल पर पूजा-अर्चना कर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद मलूकेश्वर महादेव का महाभिषेक कर भगवान सीताराम के दर्शन किए। आगे चलकर उन्होंने पानीघाट स्थित पहाड़ी बाबा गोशाला में मंच पर उपस्थित संतों का सम्मान किया और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव भी मौजूद रहे। दोनों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत शामिल हुए।