PM मोदी को अमेरिका आने का न्योता :विदेश मंत्री रूबियो ने PM से मुलाकात की, जानें किन मुद्दे पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बैठक के दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से पीएम मोदी को अमेरिका आने का न्योता दिया। करीब एक घंटे चली इस बातचीत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद रहे।
बैठक में सुरक्षा, व्यापार, रक्षा और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। लेकिन इस मुलाकात को सिर्फ सामान्य कूटनीतिक बैठक नहीं माना जा रहा।
चीन दौरे के बाद क्यों अहम हुई यह यात्रा?
रूबियो की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप हाल ही में चीन दौरे से लौटे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की बीजिंग यात्रा ने एशियाई राजनीति में नई हलचल पैदा की है।
चीन में ट्रंप राष्ट्रपति शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ की और उन्हें महान नेता व करीबी दोस्त बताया। इसके बाद एशिया के कई देशों में यह सवाल उठने लगे कि अमेरिका की चीन नीति अब किस दिशा में जाएगी। इसी वजह से कुछ विश्लेषक रूबियो की दिल्ली यात्रा को डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी मान रहे हैं, ताकि भारत को भरोसा दिलाया जा सके कि अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में उसकी जगह मजबूत बनी हुई है।
भारत-अमेरिका रिश्तों में क्यों आया तनाव?
पिछले करीब एक साल से भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ मुद्दों पर खटास देखी जा रही थी। इनमें व्यापार, कूटनीतिक बयानबाजी और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन और भारत के बीच टैरिफ को लेकर भी विवाद बढ़ा था। ट्रम्प ने भारत पर भारी शुल्क लगाए थे। वहीं भारत ने ट्रंप के उस दावे को भी सार्वजनिक तौर पर खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान तनाव कम कराने में अपनी भूमिका बताई थी।
पाकिस्तान को लेकर भारत की चिंता क्या?
हाल के दिनों में पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख भी नई चर्चा का विषय बना है। ट्रम्प ने पाकिस्तान के नेताओं की तारीफ की है और उन्हें कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में मध्यस्थ की भूमिका वाला देश बताया है।
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भारत में इसे ऐसे संकेत के रूप में देखा गया कि अमेरिका फिर से पाकिस्तान को रणनीतिक महत्व देने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि दिल्ली में हुई बातचीत का एक अहम उद्देश्य यह समझना भी माना जा रहा है कि ट्रम्प सरकार की एशिया नीति आगे कैसी होगी।
इस मुलाकात का क्या असर हो सकता है?
रूबियो की यात्रा से संकेत मिलता है कि दोनों देश मतभेदों के बावजूद रिश्तों को कमजोर नहीं होने देना चाहते। भारत के लिए अमेरिका अहम रणनीतिक साझेदार है, जबकि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत को महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मोदी के संभावित अमेरिका दौरे और आगे की बातचीत से दोनों देशों के रिश्तों में कितनी नई गर्माहट आती है।











