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जबलपुर : शिक्षक भर्ती पर MP हाईकोर्ट बड़ा फैसला, जनरल कैटेगरी के लिए टीईटी में 60 प्रतिशत अंक जरूरी

सुनवाई के बाद दिए फैसले में डिवीजन बेंच ने विज्ञापन की धारा 12.4 को पूरी तरह वैध मानते हुए कहा कि उम्मीदवारों ने भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के बाद नियमों को चुनौती दी, इसलिए असफल होने के बाद नियमों पर सवाल उठाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
 शिक्षक भर्ती पर MP हाईकोर्ट बड़ा फैसला, जनरल कैटेगरी के लिए टीईटी में 60 प्रतिशत अंक जरूरी

पीपुल्स संवाददाता, जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि उम्मीदवार यदि आरक्षण का लाभ लेकर शिक्षक पात्रता परीक्षा पास हुए हैं तो उन्हें सामान्य वर्ग में शिफ्ट होने का मौका नहीं मिलेगा। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि सामान्य वर्ग के लिए टीईटी में 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं, जबकि आरक्षित वर्ग को 50 प्रतिशत की छूट दी गई है।

60 % से ज्यादा अंक लाने वाले ही सामान्य वर्ग में दावा कर सकेंगे

ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने इस छूट का लाभ लेकर पात्रता हासिल की, उन्हें सामान्य वर्ग में माइग्रेशन का अधिकार नहीं मिलेगा, चाहे चयन परीक्षा में उनके अंक सामान्य वर्ग के कटऑफ से अधिक ही क्यों न हों। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि वे उम्मीदवार जो बिना किसी छूट के 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाए हों, सिर्फ वे ही सामान्य वर्ग में दावा कर सकेंगे। इस मत के साथ बेंच ने उन 54 याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें सामान्य वर्ग में शिफ्ट होने की राहत हाईकोर्ट से चाही गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले का असर टीईटी में शामिल हुए सैकड़ों छात्रों पर पड़ेगा।

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आवेदकों ने क्या कहा

हाईकोर्ट में ये 54 याचिकाएं सागर के अभिलाष जैन व अन्य की ओर से दाखिल की गई थीं। आवेदकों का कहना था कि कर्मचारी चयन बोर्ड ने मिडिल और प्राइमरी स्कूल टीचरों की भर्ती के लिए धारा 12.4 में एक पैमाना तय किया था। इसके मुताबिक, आरक्षित वर्ग के किसी उम्मीदवार ने यदि 150 में से 90 (60 फीसदी) से कम अंक हासिल किए, तो वे आरक्षित श्रेणी में ही माने जाएंगे। वे अनारक्षित वर्ग में चयन के पात्र नहीं होंगे।  

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डिवीजन बेंच ने वैध माना फैसला

सुनवाई के बाद दिए फैसले में डिवीजन बेंच ने विज्ञापन की धारा 12.4 को पूरी तरह वैध मानते हुए कहा कि उम्मीदवारों ने भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के बाद नियमों को चुनौती दी, इसलिए असफल होने के बाद नियमों पर सवाल उठाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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