VIT Students Case : यूनिवर्सिटी में तानाशाही, शिकायत करने पर स्टूडेंट्स को देते थे फेल करने की धमकी

सीहोर स्थित VIT यूनिवर्सिटी में छात्रों के प्रदर्शन के बाद जांच जारी है। जानकारी के अनुसार जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यूनिवर्सिटी में तानाशाही जैसा प्रबंधन है। छात्रों को बात-बात पर धमकी दी जाती है।
 यूनिवर्सिटी में तानाशाही, शिकायत करने पर स्टूडेंट्स को देते थे फेल करने की धमकी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम, भोपाल। मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने  सीहोर स्थित VIT यूनिवर्सिटी की घटना की जांच करने के लिए बनाई तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट शुक्रवार को शासन को सौंप दी है। अब रिपोर्ट पर सरकार निर्णय लेगी। रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसके अनुसार वीआईटी प्रबंधन परिसर में तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाया जाता है। किसी तरह की शिकायत करने, मैनेजमेंट के खिलाफ बात करने पर विद्यार्थियों को फेल करने की धमकी दी जाती थी। आईकार्ड जब्त कर उन्हें परीक्षा में शामिल होने से रोकने, प्रायोगिक परीक्षा में कम अंक देने जैसे बातें भी सामने आई हैं। भोजन व्यवस्था की शिकायत करने पर विद्यार्थियों की सुनवाई नहीं होती है, कहा जाता है कि जो बना है, वही खाना पड़ेगा। 

    सिर्फ दो अफसरों के पास ही सारे अधिकार

    यूनिवर्सिटी परिसर में सिर्फ दो अधिकारियों के पास ही सारे अधिकार थे। वहां कई पदाधिकारी बनाए गए थे, लेकिन ये सिर्फ नाम के थे। इन्हीं दो अधिकारियों के जरिए सारे निर्णय होते थे।

    भयपूर्ण अनुशासन

    परिसर में भयपूर्ण वातावरण तैयार किया जाता है। घटना के दिन पहले प्रबंधन ने भय दिखाकर घटना को नियंत्रित करने का प्रयास किया था। जब छात्र नियंत्रण में नहीं आए तो रात  दो बजे  पुलिस प्रशासन को  सूचित किया। जब पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लिया, तब तक विद्यार्थी उग्र हो चुके थे।

    मिलता है बदबूदार पानी

    जांच समिति ने पाया कि हॉस्टल के संचालन का ठेका एक एजेंसी को दिया गया है, लेकिन इस पर नियंत्रण में कमी पाई गई है। छात्रावास के बच्चों ने भोजन, पानी की गुणवत्ता  खराब बताई। स्टूडेंट्स ने बताया- जो पानी उन्हें मिलता है, उसमें बदबू आती है। ऐसा कई महीनों से चल रहा है।

    बीमार छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड नहीं कराया उपलब्ध

    प्रबंधन ने समिति को बताया कि एक तारीख से 24 नवंबर तक 23 छात्रों, 12 छात्राओं को पीलिया होने की शिकायतें हुई हैं। प्रबंधन ने इस दौरान का कोई संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया है। 

    संस्थान का चिकित्सा केंद्र भी सवालों के घेरे में

    यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर एक चिकित्सा केंद्र भी है। केंद्र में बीमारी के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी मिली।  स्टूडेंट्स में बीमारी रोकने के लिए प्रयास नहीं किए गए। चिकित्सा केंद्र होने की जानकारी सरकार को नहीं दी गई है। यूनिवर्सिटी में इसका कोई भी रिकॉर्ड नहीं मिला। 

    किले की तरह है परिसर

    कैंपस किले की तरह है। यहां का प्रबंधन सभी पर अपना कानून चलाता है। इसका उदाहरण घटना के दिन दिखा जब सीहोर के सीएमओ को प्रबंधन ने गेट पर दो घंटे तक रोक कर रखा ।

    जांच समिति को भी नहीं किया सहयोग

    जांच समिति को भी प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया। समिति ने पाया कि प्रबंधन के मन में यह पूर्वाग्रह स्पष्ट परिलक्षित हो रहा था कि समिति उनके विरुद्ध कार्य करने के लिए ही आई है।

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    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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