तेल रिफायनरियों में दुर्घटना या सजिश! विशाखापट्टनम रिफाइनरी में धमाके के बाद भीषण आग, इस साल 6 महीने में ही तीसरा हदसा

भोपाल। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित एक तेल रिफाइनरी में बड़ा धमाका हुआ, जिसके बाद भीषण आग लग गई। घटनास्थल से आग की ऊंची लपटें और धुएं का घना गुबार उठता दिखाई दिया। रिफायनरी में आग लगने की इस साल की तीसरी घटना है। इससे पहले इसी साल दो घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 20 अप्रैल 2026 को पचपदरा (राजस्थान) में HPCL की निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड रिफाइनरी में आग लगी। 30 सितंबर 2026 को MRPL रिफाइनरी, मंगलुरु (कर्नाटक) में विस्फोट हुआ। इसके बाद 2 नवंबर 2026 को HPCL विशाखापत्तनम रिफाइनरी (आंध्र प्रदेश) के पिच इंटरमीडिएट स्टोरेज टैंक में आग लग गई। देखने में तो यह सभी औद्योगिक दुर्घटनाएं लग लगती हैं लेकिन लगातार हो रही दुर्घटनाएं शंका उत्पन्न करती हैं कि इनके पीछे कोई साजिश तो नहीं।
पीएम की विजिट से ठीक पहले हुआ था हादसा
यह शंक तब और पुख्ता होती नजर आती है जब पचपदरा (राजस्थान) में रिफायनरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के एक दिन पहले दुर्घटना होती है। मोदी रिफायनरी की उद्घाटन करने वाले थे। इस दुर्घटना की जांच भी कराई जाती है।
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यूक्रेन भी रूस की रिफायनरी पर कर रहा हमला
यहां ध्यान देने योग्य यह भी है कि रूस को कमजोर करने के लिए यूक्रन ने भी उसकी तेल रिफायनरियों पर ही हमले किए हैं। यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी यूक्रेन को इन हमलों को रोकने के लिए बोलना पड़ गया था। लेकिन यूक्रेन ने बात नहीं मानी। इसके बाद रूस ने तेल निर्यात रोकने की घोषणा कर दी जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने लगीं।
निशाने पर हो सकती हैं क्योंकि यह हैं देश की वेल्युएबल एसेट्स
रिफायनरियां देश को मिलने वाले क्रूड को ही साफ नहीं करतीं। यह देश की तकनीकी, रणनीतिक और आर्थिक ताकत को भी दिखाती हैं। यह विदेशी मुद्र भी कमा कर देती हैं।
तकनीकी शक्ति:
भारत उन गिने चुने देशों में से एक है जिसके पास भारी क्रूड साफ करने की क्षमता है। दुनिया के ज्यादातर देश जिस क्रूड को रिफाइन करते हैं वो उच्च क्वालिटी का होता है, लेकिन हैवी क्रूड को को साफ करने में बेहतर तकनीकी क्षमता लगती है। यह रिफायनरियां देश-दुनिया को तेल की निर्बाध सप्लाई बना कर रखती हैं। ऐसे में रिफायनरियों को निशाना बनाना तेल सप्लाई चेन को बाधित करने का तरीका है।
रणनीतिक शक्ति:
एक सप्ताह पहले ही अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर पहुंचे। उन्होंने मुंबई में लैंड किया और सीधे जामनगर स्थित रिलायंस की रिफायनरी पहुंच गए। कारण था यह जांचना कि क्या जामनगर की रिफायनरी वेनेजुएला का क्रूड रिफाइन कर तेल की सप्लाई चेन को टूटने से बचा सकती है जो होमुर्ज के लगातार बंद रहने से प्रभावित है। अमेरिकी विदेशमंत्री की यह विजिट देश की रणनीतिक शक्ति को दिखाती है। कैसे दुनिया के सबसे ताकतवर देश को भारत की तरफ मदद के लिए देखना पड़ रहा है।
आर्थिक शक्ति:
भारत दुनिया भर में तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। देश की विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा तेल खरीदने में जाता है। ऐसे में क्रूड खरीद कर अगर उसे देश में कंज्यूम कर लिया जाए तो आर्थिक स्रोतों पर बड़ा बोझ पड़ेगा। इस बोझ को तब कम किया जा सकता है जबकि हम क्रूड खरीदें और रिफाइन्ड तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स दूसरे देश को बेचें। यह रिफायनरियां देश को वह जरूरी विदेशी मुद्रा भी कमा कर देती हैं। आंकड़ों की बात करें तो भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। इसका वार्षिक निर्यात मूल्य 85 अरब डॉलर से अधिक है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ही भारत ने 35.31 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया है।
यूरोप को भारत ने किया तेल सप्लाई
यूक्रेन से युद्ध शुरू हो जाने के बाद यूरोप ने रूस से तेल खरीदना कम किया। ऐसे में भारत वो देश बनकर सामने आया जिसने सर्दियों में यूरोप को देल सप्लाई कर उन्हें सर्दियों बचाया। इसके पहले पूरे यूरोप को गैस और तेल की सप्लाई रूस से पाइपलाइन से होत थी।
अब ट्रंप चाहते हैं कि सप्लाई चेन न टूटे
एक सप्ताह पहले ही अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर पहुंचे। उन्होंने मुंबई में लैंड किया और सीधे जामनगर स्थित रिलायंस की रिफायनरी पहुंच गए। कारण था यह जांचना कि क्या जामनगर की रिफायनरी वेनेजुएला का क्रूड रिफाइन कर तेल की सप्लाई चेन को टूटने से बचा सकती है। होर्मुज ब्लॉक होने और यूक्रेन द्वारा रूस की रिफायनरियों पर हमलों के बाद से दुनिया भर की तेल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। जिसे ठीक करने में भारत मदद कर सकता है। इस बीच ट्रंप सरकार ने इस सप्लाई चेन को कुछ दुरुस्त करने के लिए कोशिश की है। उनका प्लान यह है कि अगर रिलायंस की जामनगर रिफायनरी इस सप्लाई चेन को ठीक करने में मदद कर दे तो तेल की कीमतों को वैश्विक रूप से स्थिर रखा जा सकता है।




















